संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी सुयशा भारती ने सत्संग में मानव जीवन एवं भक्ति मार्ग के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य की जीवन शैली और कार्य व्यवहार करने का ढंग उसकी धारणाओं व मान्यताओं पर आधारित होता है।
साध्वी ने कहा कि मनुष्य के पूर्व जन्मों के परिणाम स्वरूप ही उसे माता पिता, घर का वातावरण व संगी साथी मिलते हैं। वह अपने परिवार और समाज के अनुकूल ही व्यवहार, रीति रिवाज,परंपराएं और कर्मकांड का अनुसरण करता है। ये सब उसकी जीवनचर्या का एक महत्वपूर्ण अंग बन जाते हैं, जिनसे मनुष्य की एक अपनी व्यक्तिगत विचारधारा का निर्माण होता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा आत्मा की दिव्य ऊर्जा का स्रोत है। उस स्रोत से जुड़ने के लिए आत्मा को कई पड़ाव पार करने पड़ते हैं। अपने कर्मों से बंधा जीव जब पुण्य संस्कारों के फलस्वरूप किसी सात्विक वातावरण में जन्म लेता है तो उसकी भक्ति यात्रा आरंभ होती है। वहां वह जीवात्मा पूजा,पाठ, जप, तप, दान,भजन संकीर्तन में प्रवृत्त होता है, जिससे उसकी भक्ति प्रगाढ़ होती है और मन में सत्य को जानने की जिज्ञासा का जन्म होता है।
साध्वी ने बताया कि भक्ति भावना और सत्य की जिज्ञासा ही उसे सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा से जुड़ने के लिए एक कड़ी बनती है। ब्रह्म ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात निरंतर ध्यान साधना के द्वारा ही जीवात्मा इस बात का अनुभव कर पाता है कि प्रत्येक जीवात्मा कितने ही जन्मों से अपने परम स्रोत से जुडऩे के लिए चल रही है। इस यात्रा के दौरान परमपिता परमात्मा के पास जीव की सच्ची प्रार्थना पहुंचती है जब जब वह स्वार्थ रहित होकर परोपकार की भावना से समाज कल्याण के लिए कार्य करता है।