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Haryana: हथिनी कुंड बैराज का बढ़ा जलस्तर, यमुना के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी, सोमनदी की टूटी पटरी

Sun, 11 Aug 2024 10:54 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापनगर, छछरौली, यमुनानगर (हरियाणा)

सार

बैराज पर 61768 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी ओर सोमनदी की पटरी टूट गई। इससे खानूवाला पानी में डूब गया। गांव में चार-पांच फीट तक पानी भर गया। ग्रामीण छतों के ऊपर चढ़ गए।
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हथिनी कुंड बैराज पर जलस्तर को दिखाते गेज रीडर शेर सिंह। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश से यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इससे यमुना नदी के ऊपर बने हथिनी कुंड बैराज का जलस्तर भी बढ़ गया। रविवार शाम 6 बजे 61768 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। हालांकि सुबह 7 बजे यहां 44991 क्यूसेक पानी पहुंचा था।

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हथिनी कुंड बैराज कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मैदानी व पहाड़ी इलाकों में बारिश होने से यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रविवार शाम 6 बजे हथिनी कुंड बैराज पर 61768 के पानी दर्ज किया गया। जिसमें से यमुना में 42248 पश्चिम नहर में 16510 व यूपी को 3010 क्यूसेक पानी दिया गया।

रविवार सुबह 7 बजे 44991, 8 बजे 61659, 9 बजे 49143, 10 बजे 50220, 11 बजे 50340, 12 बजे 50592, दोपहर एक बजे 56403, 2 बजे 64612, 3 बजे 54739, 4 बजे 58848, 5 59149 व 6 बजे 61768 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिसमें से 42248 यमुना, 16510 पश्चिम नहर व 3010 यूपी को छोड़ा गया।
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वहीं, यमुनानगर के छछरौली बाढ़ के पानी की वजह से सोमनदी की पटरी टूट गई और देखते ही देखते खानूवाला गांव पूरी तरह से पानी में डूब गया। गांव में चार-पांच फीट तक पानी भर गया। ग्रामीण सामान वगैरह भी इकट्ठा नहीं सके। खानूवाला में बाढ़ का पानी घुसने की सूचना मिलते ही खानूवाला के रिश्तेदार परिचित मदद के लिए मौके पर पहुंचे। गांव के बाहर पानी कम होने का इंतजार करते रहे।

ग्रामीण गगन अमराव ने बताया कि गांव में पहले भी पटरी टूट गई थी जिससे पानी भर गया था। घरों में पानी घुसने लोगों को अपने घर की छतों का सहारा लेना पड़ा। उधर ग्रामीणों के रिश्तेदार भी ट्रैक्टर ट्राॅली लेकर मदद के लिए खानूवाला में पहुंचने लगे हैं। दरअसल, ये हालात पहाड़ों पर लगातार हुई बारिश होने से सोमनदी में उफान होने से बने हैं। तेज बहाव से भम्नौली गांव के पास से सोमनदी की पटरी टूटते ही देखते ही देखते करीब आधा दर्जन गांवों में पानी घुस गया।

ग्रामीण सुखदेव, अमरजीत, नरेंद्र व राम करण के मुताबिक हर साल प्रशासन बाढ़ बचाव कार्य को दुरुस्त रखने का दावा करता है, लेकिन जब बाढ़ आती है तो सभी दावे हवाई हो जाते हैं। हर मानसून में साल खानूवाला, चिंतपुर, लोप्पो, तिहाणो इन गांव में कहीं ना कहीं सोमनदी की पटरी टूट जाती है, जिससे काफी नुकसान होता है। ग्रामीणों की मांग है कि सोम नदी के किनारे पर पक्का कंक्रीट का कार्य किया जाए तो इस परेशानी से बचा जा सकता है।

बाढ़ के पानी में डूबने से किसान की मौत
बाढ़ के पानी में चिंतनपुर गांव 55 वर्षीय किसान सतपाल डूब गया। इससे उसकी मौत हो गई। किसान का शव एनडीआरएफ की टीम ने तलाश कर बरामद कर लिया है। किसान की पुलिया से नीचे गिरकर पानी में डूबने से मौत हुई है।

उस समय नदी में करीब 32 हजार क्यूसेक पानी था। सिंचाई विभाग नदी की हर स्थिति पर नजर जमाए था, जो जलस्तर कालाअंब में मारकंडा नदी का सुबह करीब आठ बजे 11 फीट था वो जलस्तर घटकर दोपहर साढ़े 12 बजे करीब पांच फीट रह गया था। इससे सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली। रुण नदी में करीब 20 हजार क्यूसेक पानी आने से मुलाना में मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ता गया। ये शाम चार बजे 8.8 फीट करीब 41300 क्यूसेक तक जा पहुंचा। इसके बाद पांच बजे जलस्तर 9.3 फीट 45000 क्यूसेक तक और शाम छह बजे 10 फीट यानी 49073 क्यूसेक तक पहुंच गया था जोकि इस वर्ष का अधिकतम जलस्तर है। जबकि कालाआम्ब में मारकंडा नदी का जलस्तर घटकर करीब तीन फीट रह गया था।

नकटी नदी ने मचाया उत्पात
बारिश के चलते नकटी नदी भी उफान पर आ गई। इससे सैहला गांव के कई एकड़ फसलों को नुकसान हुआ। नदी में पानी का तेज बहाव गांव की सड़क तक भी पहुंच गया था। स्थानीय निवासी वाले भीम सिंह और देव राणा ने बताया कि शनिवार और रविवार को नकटी नदी के तेज बहाव ने गांव में कई एकड़ फसल को बर्बाद कर दिया है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इसके साथ-साथ मारकंडा नदी के पानी ने भी जफरपुर गांव व हेमा माजरा गांव तक मार की है। वहीं, नदी किनारे कई खेतों में भी मारकंडा नदी का पानी पहुंच गया है।

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