यमुनानगर में त्रिकोणीय मुकाबला
यमुनानगर में भाजपा ने निवर्तमान विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को तीसरी बार उतारा है। पिछले दो चुनाव से पूर्व विधायक व इनेलो प्रत्याशी दिलबाग सिंह उन्हें कड़ी टक्कर देते रहे हैं। वे इनेलो नेता अभय चौटाला के समधी हैं। इस बार कांग्रेस से रमन त्यागी को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां भाजपा को भितरघात का खतरा है, क्योंकि घनश्याम दास को टिकट देने के बाद से कुछ नेता अभी भी खुलकर प्रचार नहीं कर रहे।
साढौरा में हुड्डा समर्थक हाथी पर सवार होकर मुख्य मुकाबले में आए
आरक्षित सीट साढौरा में कांग्रेस की निवर्तमान विधायक रेनू बाला के सामने तीन बार के पूर्व विधायक व भाजपा प्रत्याशी बलवंत सिंह है। रेणु बाला को टिकट देने से नाराज भूपेंद्र और दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक बृजपाल छप्पर बागी हो गए। वह हाथ को छोड़कर हाथी पर सवार हैं। इस कारण मुख्य मुकाबला अब बलवंत सिंह और बृजपाल के बीच ही नजर आ रहा है। बलवंत सिंह की राह भी पूर्व प्रत्याशी दाता राम ने बागी होकर मुश्किल कर रखी है। वे कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं।
रादौर में कांबोज खराब कर सकते हैं खेल, बसपा के प्रदेशाध्यक्ष भी मुकाबले में
यहां भाजपा ने पूर्व राज्य मंत्री कर्णदेव कांबोज को दरकिनार करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिव श्याम सिंह राणा को प्रत्याशी बनाया है। रादौर या इंद्री दोनों में से किसी एक जगह से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कांबोज को यहां भी टिकट नहीं मिला। सीएम नायब सैनी के मनाने से भी वह नहीं माने और बागी होकर कांग्रेस में शामिल हो गए। यहां श्याम सिंह राणा का मुकाबला कांग्रेस के वर्तमान विधायक डॉ. बीएल सैनी से है। अब बीएल सैनी को कर्णदेव का भी साथ है। यहां कांबोज समाज के वोट राजपूत समाज से ज्यादा हैं। दलित समाज के वोट काटने के लिए खुद बहुजन समाज पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल तिगरा रादौर से चुनाव लड़ रहे हैं।