यमुनानगर। छप्पर थाना पुलिस ने हरियाणा नर्सेज एंड नर्स-मिडवाइव्स काउंसिल (एचएनएनएमसी) पंचकूला के पूर्व कार्यवाहक रजिस्ट्रार पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई शहीद भगत सिंह स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज रजपुरा के निदेशक संजीव कुमार अग्रवाल की शिकायत पर की गई। आरोप है कि पूर्व कार्यवाहक रजिस्ट्रार ने काउंसिल की अनुमति के बिना नौ शिक्षण संस्थानों के 53 छात्रों को परीक्षा में प्रवेश दिया और उनसे लिया परीक्षा शुल्क स्वयं हड़प लिया।
शहर की भारत कॉलोनी निवासी संजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि वह छप्पर के राजपुर स्थित शहीद भगत सिंह स्कूल ऑफ नर्सिंग कॉलेज के निदेशक हैं। साल 2005 में उन्होंने उदयभान शर्मा व अन्य के साथ मिलकर यूनिवर्सल फाउंडेशन के नाम से एजूकेशन सोसायटी की स्थापना की थी। सोसायटी द्वारा साल 2006 में रजपुरा में शहीद भगत सिंह स्कूल ऑफ नर्सिंग के नाम से कॉलेज शुरू किया गया था। कॉलेज में जीएनएम (तीन वर्षीय कोर्स) व एएनएम एमपीएचडब्ल्यू (डेढ़ वर्षीय कोर्स) की पढ़ाई होती थी। कुछ विवाद होने के कारण उदयभान शर्मा उनसे अलग हो गये। तीन दिसंबर 2008 को उदयभान शर्मा ने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर परशुराम एजूकेशन सोसायटी रोहतक के नाम से बनाई। इससे पूर्व 15 नवंबर 2008 को उन दोनों पक्षों का एक समझौता हुआ था, जिसके तहत उदयभान शर्मा ने यूनिवर्सल फाउंडेशन से इस्तीफा दिया। इसके बाद उसे भगवान परशुराम एजूकेशन सोसायटी का अध्यक्ष बनाया गया। तब प्रस्ताव पास कर भगवान परशुराम सोसायटी को एक कोर्स एमपीएचडब्ल्यू महिला दिया गया। साथ ही तय किया गया कि एक अप्रैल 2009 से यूनिवर्सल फाउंडेशन केवल जीएनएम कोर्स (तीन वर्षीय) चलाएगा। दोनों संस्थाएं अलग-अलग काम करेंगी। एक जून 2009 से उदयभान ने अपनी सोसायटी के साथ नए पते पर कॉलेज शुरू कर दिया। नवंबर 2014 में इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने अपने पत्र के माध्यम से सूचित किया कि उदयभान शर्मा के संस्थान को बंद कर दिया गया है, जिसके तहत उसके संस्थान में एमपीएचडब्ल्यू पाठ्यक्रम के लिए किसी को प्रवेश की कोई अनुमति नहीं दी जा सकती थी।
शिकायतकर्ता संजीव कुमार अग्रवाल ने बताया कि साल 2018 में उदयभान ने अपने संस्थान में जीएनएम व एमपीएचडब्ल्यू कोर्स शुरू कर दिया, जबकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा 19 नवंबर 2014 को उसे बंद कर दिया गया था। आरोप है कि उदयभान ने एचएनएनएमसी अर्थात हरियाणा नर्सेज एंड नर्स-मिडवाइव्स काउंसिल पंचकूला के कार्यवाहक रजिस्ट्रार के साथ मिलीभगत करके दोनों पाठ्यक्रमों को शुरू किया था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर उसे पता चला है कि वर्ष 2018-19 में कार्यवाहक रजिस्ट्रार ने नर्सिंग के ऑनलाइन पोर्टल पर नौ नर्सिंग संस्थानों के 53 छात्रों को प्रवेश दिया और उनके परीक्षा फार्म इंडियन नर्सिंग काउंसिल में जमा करवाए। इसके बाद इन 53 छात्रों को परीक्षा में प्रवेश देने की स्वयं अनुमति दी थी। जांच अधिकारी उप निरीक्षक सुरेंद्र कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।