यमुनानगर। बिजली निगम में सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेचुएटी और भत्तों की फर्जी पेमेंट करने का मामला सामने आया है। करीब 70 लाख रुपये के फर्जीवाड़े के सबूत सीआईए-टू पानीपत ने जुटाए हैं। कयास लगाया जा रहा है कि यह करोड़ों रुपये का लेन-देन भी हो सकता है, जिसमें कई बड़े अधिकारी फंस सकते हैं। सीआईए-टू इस मामले में पूछताछ के लिए बिजली निगम बिलासपुर के एक्सईएन और डिविजनल अकाउंटेंट को साथ लेकर गई है। अकाउंटेंट के पास से तीन-चार फर्जी वाउचर भी सीआईए ने बरामद किए। दो दिनों से दोनों से पानीपत में पूछताछ की जा रही है। इस फर्जीवाड़े से पूरे बिजली निगम में हड़कंप मचा हुआ है।
अपने सेवानिवृत कर्मचारियों को बिजली निगम द्वारा ग्रेचुएटी, पेंशन व अन्य भत्तों का भुगतान किया जाता है। अकाउंटेंट पहले जगाधरी डिवीजन में कार्यरत था। इन दिनों वह बिलासपुर डिवीजन में ड्यूटी कर रहा है। जांच में पता चला है कि सेवानिवृत कर्मचारी के नाम से अकाउंटेंट जो वाउचर भरता था, उसी नाम से तीन-चार महीने बाद दूसरा वाउचर काट दिया जाता था, परंतु दूसरे वाउचर में जो रकम भरी जाती थी, वह सेवानिवृत कर्मचारी के खाते की बजाय उसी नाम के अपने जानकार के खाते में जमा करवाते थे। एक ही नाम के खाते में राशि जमा होने से किसी को शक भी नहीं होता था।
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इस तरह हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
पानीपत के इसराना में रहने वाले टैक्सी चालक व्यक्ति का लोन पास कराने के लिए उससे दो लोग मिले थे। दोनों ने उसे करीब तीन लाख रुपये का लोन दिलाने की बात कही। उसने लोन के लिए हामी भर दी। कुछ दिन बाद उसके बैंक खाते में लोन की राशि आ भी गई। तभी समालखा निवासी अनिल टैक्सी चालक से मिलकर कहता है कि उसके खाते में जो राशि आई है, वह उसके लोन की नहीं है। वह राशि उसकी थी और गलती से उसके खाते में जमा हो गई। इस पर टैक्सी चालक ने ईमानदारी का परिचय देते हुए सारी राशि निकलवा कर अनिल को सौंप दी। इसी दौरान टैक्सी चालक को पता चलता है कि उसके खाते में जो लोन की राशि आई थी वह यूएचबीवीएन के खाते से आई थी, जबकि उसने लोन के लिए बैंक में फार्म दिए थे। टैक्सी चालक को लगा कि कहीं वह किसी झूठे केस में न फंस जाए तो उसने थाना समालखा में इसकी शिकायत कर दी। मामले में आठ फरवरी को फर्जीवाड़े की एफआईआर जिला पानीपत के थाना समालखा में दर्ज हुई थी। इसकी जांच सीआइए-टू ने शुरू की तो फर्जी पेमेंट करने का पता चलता। कर्मचारी जिसके खाते में वाउचर जमा कराते थे उसे कुछ कमीशन देकर बाकी राशि खुद ले लेते थे।
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एक्सईएन और अकाउंटेंट को सीआईए लेकर गई है : राजिंद्र कुमार
बिजली निगम के एसई राजिंद्र कुमार का कहना है कि इस मामले की एफआईआर पानीपत में दर्ज हुई है। सीआईए-टू मामले की जांच करते हुए यमुनानगर आई थी। बिलासपुर में अकाउंटेंट से कुछ फर्जी वाउचर मिलने की बात सीआईए ने कही है। सीआईए अकाउंटेंट और एक्सईएन बिलासपुर को पूछताछ के लिए साथ लेकर गई है।