छठ पर्व को लेकर महज दो दिन शेष हैं। इसकी तैयारियों के लिए आयोजक ही साफ-सफाई व अन्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की कमान संभाले हुए हैं। जबकि बाडीमाजरा पुल, रेलवे पुल, चिट्टा मंदिर के समीप पश्चिमी यमुना नहर के घाट और किनारों पर प्रशासन के प्रबंध पुख्ता नहीं दिख रहे हैं।
बता दें कि जिले में पूर्वोत्तर राज्यों के लाखों लोग रहते हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर पर्व के दो दिन पूजन व स्नान करते हैं। इनमें सबसे अधिक लोग पश्चिमी यमुना नहर के चिट्टा मंदिर, बाडीमाजरा पुल और रेलवे पुल स्थित घाट व किनारों पर जुटते हैं।
इस बार यह पर्व 17-18 नवंबर को मनाया जाएगा, किंतु सूरत-ए-हाल यह है कि हजारों लोगों की आस्था का केंद्र होने के बावजूद नहर के घाटों और किनारों की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। जगह-जगह गंदगी का आलम है वहीं, नहर में सीधे गिर रहे नालों से भी यमुना में गंदगी मिल रही है।
जबकि पर्व को महज दो दिन का समय बाकी है। इसके अतिरिक्त यहां तक पहुंचने के रास्तों और घाटों प्रशासन के इंतजाम नाकाफी दिख रहे हैं। पूजा-पाठ करने वाले समाज के लोग खुद स्थिति को दुरुस्त करने में लगे हैं वहीं, दूसरी तरफ जिन लोगों की मन्नत पूरी हुई है उनकी ओर से घाट पर पूजा के लिए वैदियां बनाने का काम जोरशोर से चल रहा है।
करना पड़ेगा गड्ढों व धूल का सामना
छठ पर्व पर शहर में सबसे अधिक श्रद्धालु बाडीमाजरा पुल व चिट्टा मंदिर के समीप पश्चिमी यमुना नहर के किनारे व घाट पर पहुंचते हैं। बीते वर्ष कच्ची पगडंडी को समानांतर करने के लिए मिट्टी डाली गई थी, जबकि इस बार ऐसा नहीं किया गया। मार्ग पर वाहनों की आवाजाही के बीच राहगीरों व चालकों को धूल का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार सिटी सेंटर रोड की तरफ से मार्ग खस्ताहाल होने से आने-जाने वालों को गड्ढों से गुजरना पड़ता है। छठ पर्व पर भी यहां पहुंचने में श्रद्धालुओं को इन दिक्कतों से दो-चार होना पड़ सकता है।
सीढ़ियां न होने और फिसलन से हादसे की डर
श्रद्धालु घाट पर और नहर के पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं, लेकिन नहर के दोनों ओर किनारों व घाटों की स्थिति काफी खराब है। किनारे कच्चे हैं और न तो किसी प्रकार की सीढ़ियां हैं और न सुरक्षा के लिए पकड़ने के लिए संगल हैं। जबकि किनारों व घाटों पर काफी फिसलन होने से छठ पूजा के दिन उमड़ने वाली हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच बड़ा हादसा हो सकता है। उधर, संबंधित विभाग की मानें तो जल्द ही इससे निजात दिलाने के लिए रेत के कट्टों से अस्थाई सीढ़ियां बनाई जाएंगी।
लाइटों का भी नहीं कोई प्रबंध
बाडीमाजरा पुल के चारों ओर स्ट्रीट लाइट और साथ लगते पार्क से लाइटें गायब हैं। अभी तक छठ पूजा को लेकर प्रशासन ने कहीं भी लाइटों का प्रबंध नहीं किया है। श्रद्धालु एक दिन देर शाम डूबते सूर्य और दूसरे दिन अलसुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जुटते हैं। इस दौरान अंधेरा होने पर श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।