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सड़क से गांव-घर तक जश्न में डूबे किसान, फूलों की बारिश, बंटे मिष्ठान

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आंदोलन से लौटने पर किसानों का फूल माला पहनाकर स्वागत करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। संयुक्त किसान मोर्चा की घोषणा के बाद शनिवार को आंदोलनकारी किसान घर लौटने लगे। दिल्ली की सीमाओं से दूसरे दिन रविवार को भी दिनभर किसानों के लौटने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान जहां रास्ते में जगह-जगह किसानों का स्वागत किया गया, वहीं गांव में जश्न जुलूस निकाला गया। फिर घर पहुंचने पर भी महिलाओं ने विजय तिलक लगाकर उनका स्वागत किया।
एक साल तक चले आंदोलन के बाद तीन कृषि कानून की वापसी और अन्य मांगों पर सहमति बनने के बाद किसानों में उत्साह है, जिसकी झलक सड़क से घर तक नजर आ रही है। रविवार को भी लौट रहे किसानों पर कहीं फूलों की बारिश की गई तो कहीं दूध, जलेबी और लड्डू बांटकर उनका स्वागत किया गया। भाकियू नेताओं के अनुसार दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर आंदोलन में बैठे किसान रविवार शाम तक पहुंच गए हैं। किसानों के लौटने पर परिवार व ग्रामीणों में भी उत्साह है।
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उन्होंने कहा कि जल्द ही अब जिलेभर में धन्यवाद रैली निकाली जाएगी, जिसमें दिल्ली आंदोलन में गए किसान शामिल रहेंगे। भाकियू रतनमान गुट के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर शनिवार देर शाम गाजीपुर सीमा से अपने गांव धौड़ंग पहुंचे। यहां पर ढोल बजाकर ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। परिवार की महिलाएं आरती की थाली लेकर गांव के मुख्य प्रवेश पर उपस्थित रहीं। गांव पहुंचने पर उनकी आरती उतारी गई और विजय तिलक करके प्रवेश करवाया गया। ढोल की थाप पर ग्रामीण नाचते गाते किसानों को उनके घर तक लाए।
15 से शुरू हो सकता है टोल
किसान आंदोलन समाप्त हो चुका है और किसान भी लौट रहे हैं, परंतु टोल टैक्स अभी शुरू नहीं किया गया है। मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर अभी कुछ किसान मौजूद हैं, चूंकि वहां पर संगठन का सामान पड़ा है। टोल प्लाजा प्रबंधक विक्रम चौहान ने बताया कि किसानों ने कहा है कि वे 14 तक यहां पर रुकेंगे। वहीं कंपनी की ओर से अभी टैक्स लेने के आदेश नहीं मिले हैं। संभव है कि 15 दिसंबर से टोल शुरू हो जाएं। उनके सभी कर्मचारी यहां पहुंच गए हैं और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
आंदोलन के बाद खेत पहुंचे जिलाध्यक्ष
भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना ने घर लौटने के बाद खेत का काम संभाल लिया है। संजू गुंदियाना ने कहा कि किसानों का आंदोलन फसल व नस्ल बचाने का था। पूंजीपतियों की गुलामी से किसानों ने नस्लों को बचा लिया है और अब फसल बचाने की बारी है। इसलिए वे फसल बचाने के लिए वे खेत में काम करने पहुंच गए हैं।
घर पहुंचने पर लोगों ने किया किसानों का अभिनंदन
साढौरा। गांव फिरोजपुर के पूर्व सरपंच गुरविंद्र सिंह चिम्मा के बेटे सरजंत सिंह व अन्य किसान भी एक साल बाद रविवार को घर लौटे। वापसी पर सभी का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर लड्डू, फल और दूध इत्यादि वितरित किया गया।
सारवां में जरनैल सिंह ने नोटों की माला पहना कर किसानों का स्वागत किया। इसके बाद गांव सारवां में ही वेद प्रकाश राणा व मतलूब हसन की अध्यक्षता में लड्डू बांटकर स्वागत किया गया। गांव पण्डों में भी किसानों पर फूलों की बारिश की गई। अनाज मंडी में किसान नेता अनिल संधु ने किसानों को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया। कच्चा किला गुरुद्वारा की ओर से लगाए गए भंडारे में किसानों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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सरजंत सिंह व अमन संधु ने कहा कि एक साल तक धरनों पर ही हर पर्व मनाए गए। अब घर वापसी के बाद उनका यह दिन होली, दीवाली की तरह है। उन्होंने कहा कि 750 से अधिक किसानों को इस आंदोलन में खोने का दर्द है। यह जीत आंदोलन में शहीद किसानों को समर्पित है। इस दौरान सजीव सैनी प्रदेश उपाध्यक्ष किसान यूनियन, जसबीर सिंह, जनक सिंह, मनजीत, लखविंद्र चिम्मा, सुखविंद्र ढिल्लो, भारत सरपंच, प्रभजोत, लखविंद्र सिंह, सुरेंद्र चहलव अन्य किसान उपस्थित रहे। संवाद
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