केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए प्रवर्तन अधिकारी और एक व्यक्ति को बुधवार को कोर्ट में पेश किया। जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपियों ने जगाधरी के एक फर्म संचालक से फर्म के कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि के बकाया जमा करवाने के मामले की जांच को निपटाने के एवज में रिश्वत मांगी थी।
बता दें कि जगाधरी की एक फर्म संचालक ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उसने अपनी फर्म के कर्मचारियों के संबंध में भविष्य निधि से संबंधित नवंबर 2018 से जुलाई 2019 की अवधि की बकाया राशि जमा कर दी थी। आरोप है कि ईपीएफओ जगाधरी ने उसकी फर्म के खिलाफ सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत जांच शुरू की। उक्त जांच के दौरान ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी ने उसको एक निजी व्यक्ति से संपर्क करने को कहा। इसके बाद उसने एक व्यक्ति से मुलाकात की। आरोप है कि उसने कथित तौर पर जांच को निपटाने के एवज में प्रवर्तन अधिकारी की ओर से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इस शिकायत पर सीबीआई ने ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने फर्म संचालक को केमिकल लगाकर एक लाख रुपये दिए। इसके बाद फर्म संचालक निजी व्यक्ति को मिलने गया। जैसे ही फर्म संचालक ने निजी व्यक्ति को रुपये दिए तभी इशारे मिलते ही सीबीआई ने दबिश दे दी और निजी व्यक्ति को एक लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया।