संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ठेकेदार से मिलीभगत कर फर्जी बिलों के जरिए 12 करोड़ रुपये के घोटाले में गिरफ्तार क्लर्क प्रवीण कुमार और अशोक कुमार का रिमांड खत्म होने पर सोमवार को कोर्ट में पेश कर उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि घोटाले में एक अन्य आरोपी हेड क्लर्क कुंवर बहादुर सिंह का मंगलवार को रिमांड खत्म होगा।
उधर, एसआइटी ने घोटाले में अभी तक आठ हजार बिल, ऑडिट रिपोर्ट, एसएमबी (स्मॉल मेजरमेंट बुक) और उससे संबंधित दस्तावेजों को जब्त किया है। पुलिस की जांच में 12 करोड़ रुपये के घोटाले में दस्तावेजों पर जिन एसडीओ और जेई के साइन मिले हैं, उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लेकिन सभी ने इन साइनों को खुद के साइन मानने से इनकार कर दिया। अब पुलिस की ओर से एसडीओ और जेई के साइनों को मिलाने के लिए लैब भेजा जाएगा।
बिजली निगम में हुए घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आरोपियों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। जिस वक्त फर्जी बिलों से घोटाला हुआ है, ऐसे में उन अधिकारियों को भी तफ्तीश में शामिल किया जा सकता है जो उस वक्त ड्यूटी पर तैनात थे और तबादला हो चुका है या फिर जो रिटायर्ड हो गए हैं। चूंकि बिजली निगम में इतने बड़े पैमाने पर घोटाला जो हुआ है। ऐसे में बिजली निगम के और भी कई बड़े अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि थाना शहर यमुनानगर में बिजली निगम के एक्सईएन पवन नरूला ने फर्जीवाड़े का केस दर्ज कराया था। शिकायत में उन्होंने कहा था कि ससौली रोड स्थित एसबी रोडलाइन फर्म के पास बिजली निगम के कार्यों का ठेका था। वर्ष 2021-22 व 2022-23 के रिकार्ड की जांच करने पर सामने आया कि एसबी रोडलाइन ने डिवीजन के कार्यालय में पेमेंट के लिए फर्जी बिल जमा किए हैं।
इसमें लगभग दो करोड़ रुपये का गबन हुआ है, लेकिन जब बिजली निगम ने ऑडिट कराया तो यह 12 करोड़ रुपये का घोटाला निकला। इसके बाद जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। एसआइटी अब तक तत्कालीन एक्सईएन कुलवंत सिंह, बिलिंग क्लर्क राजबीर सिंह, लाइनमैन बलवीर व फर्म के कर्मचारी संजीव, हेड क्लर्क कुंवर बहादुर सिंह, क्लर्क कम लाइनमैन अशोक कुमार और प्रवीण कुमार को गिरफ्तार कर चुकी है।