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नियमित सफाई न होने से करनाल तक जहर फैला रही डिचड्रेन

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शहर के पुराना हमीदा से शुरू होकर करनाल जिले तक फैली डिचड्रेन पर्याप्त सफाई न होने पर प्रदूषण का कारण बन रही है। फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी डिचड्रेन में सड़ कर जहर बन रहा है। जो आसपास बने लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। वहीं, डिचड्रेन की सफाई न होने से पानी की निकासी नहीं हो रही। जिससे शहर से निकलने वाला गंदा पानी व फैक्टरियों का केमिकल युक्त पानी अब सीधे यमुना में छोड़ा जा रहा है।
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इसको लेकर कुछ दिनों पहले ही डीसी पार्थ गुप्ता व निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने डिचड्रेन का निरीक्षण किया था। उसकी पर्याप्त सफाई व निकासी न होने पर उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सख्ती से काम करने को कहा था। इससे पहले एनजीटी के चेयरमैन प्रीतम पाल ने भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व एनजीटी के उच्चाधिकारियों के साथ मिलकर यमुनानगर से लेकर करनाल जिले के डबकोली गांव तक डिचड्रेन का निरीक्षण किया था। तब भी यहां बड़ी खामियां सामने आईं थी। केमिकल युक्त पानी के कारण आसपास के ग्रामीण भयंकर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। एनजीटी चेयरमैन, डीसी व निगमायुक्त के निर्देशों के बाद भी अधिकारी डिचड्रेन को लेकर गंभीर नहीं हैं।
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अब ये है हालात
जानकारी के अनुसार यमुना को गंदे पानी से बचाने के लिए डिचड्रेन का निर्माण किया गया था। इसकी सफाई व देखरेख की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की थी। जुलाई माह में पुराना हमीदा से लेकर जम्मू कॉलोनी के श्मशान घाट के गेट तक नगर निगम द्वारा इसकी सफाई करवा दी गई थी पर आगे की सफाई नहीं हो पाई थी। कुछ दिन पहले शहर में जलभराव की स्थिति होने पर उपायुक्त पार्थ गुप्ता व निगमायुक्त अजय सिंह तोमर ने कई विभागों के अधिकारियों के साथ यहां का दौरा किया था। तब उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सफाई करने के कड़े निर्देश दिए थे। अब तक केवल झाड़ियों को काटा गया है। डिचड्रेन गंदगी से अभी भी अटी हुई है। निकासी न होने से गंदा पानी आगे जाने की बजाय पीछे ही आ रहा है।
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डिचड्रेन का गेट खोल सीधे यमुना में छोड़ा जा रहा गंदा पानी
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को यमुना नहर में न छोड़ा जाए, इसको लेकर सिंचाई विभाग की ओर से डिचड्रेन बनाई गई थी। लेकिन ऐसा न हो पाया। फैक्टरियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी व शहर का गंदा पानी सीधे पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जा रहा है। यमुनानगर में जम्मू कॉलोनी के श्मशान घाट के नजदीक बने डिचड्रेन का गेट खोलकर गंदा पानी सीधे यमुना में छोड़ा जा रहा है। वहीं, करनाल जिले के डबकोली गांव के पास यह गंदा पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। जोकि यमुना में जल प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है। डिच ड्रेन के साथ लगते गांवों के ग्रामीणों में इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
यमुनानगर के इन गांवों में दिख रहा असर
यमुनानगर के पोटली, ठसका, भगवानगढ़, रादौर, घेसपुर, धौलरा, कांजनु, जुब्बल, खुर्दबन, सुखदासपुर, दामला माजरी, करनाल के धनौरा, कलरी जागीर, मखाला, मखाली, गढ़ी बीरबल, चंद्राव, डबकौली, डेरा सिकलीगर, बीबीपुर ब्राह्मणान, शैयद छपरा सहित अन्य कई गांव में इस ड्रेन के प्रदूषण का असर देखा जा रहा है। डबकौली गांव में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां कई लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। यहां के लोगों का आरोप यह भी है कि डिचड्रेन के प्रदूषण से कई लोगों की हालत बिगड़ चुकी है। बावजूद इसके आज तक इसका समाधान नहीं हो पाया।
औद्योगिक इकाइयों के लिए यह जरूरी -
एनजीटी की गाइड लाइन के मुताबिक औद्योगिक इकाइयों से निकल रहे केमिकल युक्त पानी को ट्रीट करने के लिए इन्फ्लयूएंस ट्रीटमेंट प्लांट लगाना जरूरी होता है। लेकिन अधिकांश इकाइयों में यह नहीं है। यदि किसी में है तो उसको चलाना मुनासिब नहीं समझा जाता है। जांच के दौरान ऐसी औद्योगिक इकाइयां भी सामने आई हैं, जहां केमिकल युक्त पानी को गड्ढे बनाकर स्टोर किया जाता है। रात को यह पानी डिचड्रेन में छोड़ दिया जाता है।
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वर्जन
डिचड्रेन की सफाई का कार्य करवाया जा रहा है। झाड़ियां काट दी गई है। बाकी की सफाई का कार्य भी जल्द करवा दिया जाएगा।
आरएस मित्तल, अधीक्षक अभियंता, सिंचाई विभाग
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