संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद करने का खुलासा होने के बाद देश में तुर्किये से बने सामान का बायकॉट करने की आवाज बुलंद होने लगी है। ऐसे में जिले में तुर्किये से आने वाले सेब की डिमांड न के बराबर रह गई है। मंडियों में रोजाना तुर्किये के सेब की केवल दर्जनभर पेटी ही आ रही हैं। यह सेब भी ऑर्डर पर ही मंगवाया जाता है।
तुर्किये पर हमारे कश्मीर का सेब भारी पड़ रहा है। लोगों की पहली पसंद कश्मीर का सेब बना हुआ है। यही वजह है कि दुकानों से लेकर रेहड़ियों पर केवल कश्मीर का सेब ही बिकने के लिए रखा हुआ है। तुर्किये से जो सेब आता है उसकी डिमांड केवल ऑफ सीजन में ही ज्यादा होती है। आढ़तियों की माने तो इसमें कोई दोराय नहीं की तुर्किये से आने वाला सेब बहुत मीठा होता है।
इसके स्वाद में भी थोड़ा अंतर है। मानसून सीजन के बाद देश के कोने-कोने में कश्मीर, श्रीनगर व हिमाचल प्रदेश में पैदा होने वाले सेब की सप्लाई शुरू होने लगती है। इसलिए स्थानीय सेब की डिमांड बहुत ज्यादा होने लगती है। जब सर्दी का सीजन पीक पर होता है तो कश्मीर से बहुत अच्छी क्वालिटी का मीठा सेब आता है। इसलिए उस दौरान तुर्किये, यूएसए से आने वाले सेब की मांग न के बराबर हो जाती है।
सेब स्टोर कर लेते हैं दुकानदार
जगाधरी फल मंडी के आढ़ती प्रिंस का कहना है कि तुर्किये के सेब की डिमांड न के बराबर है। रोजाना औसतन 10 पेटी सेब ही आता है। यह सेब भी ऑर्डर पर मंगवाना पड़ता है। परंतु इससे कहीं ज्यादा कश्मीर के सबसे की मांग है। जब सर्दी में अच्छी क्वालिटी का सेब आता है तो दुकानदार व कारोबारी कश्मीर के सेब को कोल्ड स्टोर में लगा देते हैं। इससे यह कई माह तक भी खराब नहीं होता। काफी दुकानदारों ने अपने कोल्ड स्टोर भी बना लिए हैं। जरूरत के अनुसार स्टोर से निकाल कर अपनी दुकान या रेहड़ी पर बेचते हैं।