मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर गाड़ियों के ठहराव की मांग को लेकर ग्रामीणों व भारतीय किसान यूनियन ने महापंचायत की। जब रेलवे की तरफ से दो घंटे तक पंचायत में कोई अधिकारी नहीं आया तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीण नारेबाजी करते हुए रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। हालांकि इस दौरान स्टेशन अधीक्षक ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, किंतु उन्होंने उनकी एक नहीं सुनी और उल्टा खरीखोटी सुना दी।
इसके बाद ग्रामीण व किसान दोपहर 12 बजे रेलवे ट्रैक पर बैठ गए और नारेबाजी की। इसी दौरान अंबाला की तरफ से एक मालगाड़ी आई जो ट्रैक पर बैठे ग्रामीणों के धरने से पहले ही रूक गई। ग्रामीणों ने ट्रैक पर ही लंगर खाया।
बता दें पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव को लेकर इससे पहले किसान और ग्रामीण अंबाला डीआरएम कार्यालय गए थे। तब अधिकारी के आश्वासन पर वे वापस आ गए थे, किंतु इस रेलवे स्टेशन से गुजर रही पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव न होने के चलते अब आसपास के ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। करीब तीन बजे अंबाला से एडीएआरम रेलवे स्टेशन पर पहुंचे और 21 जनवरी से पहले ट्रेनों के ठहराव का आश्वासन दिया। तब जाकर ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक को खाली किया।
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना ने कहा कि पैसेंजर ट्रेन न चलने से क्षेत्र के लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है। नौकरी पेशे के अलावा महिलाएं भी परेशान हैं। यदि ट्रेन चल जाए तो लोगों को काफी राहत मिलेगी। लेकिन ट्रेनें बंद होने के कारण युवक और महिलाएं भी परेशान हैं। उनको दैनिक कार्यों के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बता दें मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर अप-डाउन करीब नौ पैसेंजर गाड़ियों का ठहराव था। जो सालों से चला आ रहा था। मगर डेढ़ साल पहले कोविड-19 के चलते लगे लॉकडाउन के कारण पैसेंजर गाड़ियां भी बंद हो गई। जब स्थिति ठीक हुई थी। तब एक ही सहानपुर-नंगल डैम गाड़ी का संचालन किया गया था, मगर यह ट्रेन कुछ ही स्टेशनों पर रूकती थी। बीच में ग्रामीणों के विरोध के बाद इस ट्रेन का ठहराव कुछ दिन के लिए करवाया गया। परंतु फिर से इसका ठहराव को बंद कर दिया गया। इसी तरह दूसरी पैसेंजर ट्रेनें भी बंद पड़ी है जिनके चलाने की मांग ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है।