बिलासपुर। अखिल भारतीय किसान सभा ने डेयरी उत्पादों व मशीनरी पर जीएसटी को वापस लेने की मांग की। जिला सचिव महिपाल चमरोड़ी ने कहा कि यह नौ करोड़ किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं व डेयरी सहकारी समितियों पर हमला है। जीएसटी परिषद ने 28 और 29 जून 2022 को आयोजित अपनी 47वीं बैठक में प्री-पैक्ड, प्री-लेबल दही, लस्सी और बटर मिल्क जैसी डेयरी वस्तुओं पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाने के साथ-साथ डेयरी पर जीएसटी बढ़ाने की सिफारिश की है।
अखिल भारतीय किसान सभा की राय है कि इस कदम से डेयरी क्षेत्र पर निर्भर नौ करोड़ से अधिक भारतीय परिवारों और पोषण के लिए दूध और इसके उप-उत्पादों पर निर्भर लाखों गरीब उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। डेयरी-किसानों की आजीविका को खतरा होगा। डेयरी मशीनरी पर उच्च जीएसटी लगाने का कदम छोटे कारोबारियों और सहकारी क्षेत्र को प्रभावित करेगा। पशुधन क्षेत्र कृषि क्षेत्र के एक-चौथाई उत्पादन में योगदान देता है। जीएसटी में हाल के बदलावों से प्राथमिक उत्पादकों या उपभोक्ताओं को लाभ नहीं होगा। राजकोषीय नीतियों के कारण सहकारी समितियां पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। संगठन देशभर के डेयरी किसानों, छोटे उद्यमियों और सहकारी क्षेत्र को एकजुट करके उठने का आह्वान करता है।