संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार सभी शुभ कार्यों के लिए भद्रा का त्याग किया जाना चाहिए। सभी हिंदू ग्रंथ और पुराण, विशेषतः व्रतराज, भद्रा समाप्त होने के पश्चात रक्षाबंधन विधि करने की सलाह देते हैं। भद्रा पूर्णिमा तिथि के पूर्व-अर्ध भाग में व्याप्त रहती है। भद्रा समाप्त होने के बाद ही रक्षा बंधन किया जाना चाहिए। यह कहना है गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के डॉ. रामराज कौशिक का।
उन्होंने बताया उत्तर भारत में ज्यादातर परिवारों में सुबह के समय रक्षा बंधन किया जाता है ,जो कि भद्रा व्याप्त होने के कारण अशुभ समय भी हो सकता है। इसलिए जब प्रात: काल भद्रा व्याप्त हो तब भद्रा समाप्त होने तक रक्षा बंधन नहीं किया जाना चाहिए। 19 अगस्त को रक्षा बंधन भद्रा मुख - 10:53 से 12:37 दोपहर (अशुभ) है। यह समय छोड़कर पूरा दिन किसी भी समय आप रक्षा बंधन कर सकते हैं।
रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। अपराह्न का समय रक्षाबंधन के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है, जो कि हिंदू समय गणना के अनुसार दोपहर के बाद का समय है। यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि की वजह से उपयुक्त नहीं है तो प्रदोष काल का समय भी रक्षा बंधन के संस्कार के लिए उपयुक्त माना जाता है।
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
-रक्षाबंधन अनुष्ठान का समय - 01:30 दोपहर से 09:08 रात्रि
-रक्षाबंधन के लिए अपराह्न का मुहूर्त - 01:43 दोपहर से 04:20 शाम
-रक्षाबंधन के लिए प्रदोष काल का मुहूर्त - 06:56 शाम से 09:08 रात्रि
-रक्षाबंधन भद्रा अंत समय - 01:30 दोपहर
-रक्षाबंधन भद्रा पूंछ - 09:51 सुबह 10:53 सुबह (शुभ )-
-रक्षाबंधन भद्रा मुख - 10:53 से 12:37 दोपहर (अशुभ)
-पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - अगस्त 19, 2024 को 03:04 सुबह-
-पूर्णिमा तिथि समाप्त - अगस्त 19, 2024 को 11:55 बजे रात्रि