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Yamuna Nagar News: अब हथिनियों की डाइट में बाजरे की खिचड़ी और तिल का तेल

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छछरौली। हाथी पुनर्वास केंद्र बन संतौर में हथिनियों की डाइट में पहली बार बाजरे की खिचड़ी और तिल का तेल शामिल किया गया है। बढ़ती ठंड को देखते हुए हाथी पुनर्वास केंद्र के प्रबंधक की ओर से यह व्यवस्था की गई है। साथ फल सब्जी व सप्लीमेंट भी दिए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र में चार मादा हाथी रह रही हैं। प्रबंधक के अनुसार, एक हाथी पर औसतन प्रतिदिन दो हजार रुपये खर्च आता है।
हाथी पुनर्वास केंद्र में वाइड लाइफ एसओएस टीम प्रबंधक आशीष बतूरा ने बताया कि ठंड को देखते हुए मादा हथिनियों की देखरेख के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। डाइट में बदलाव के साथ उन्हें भरपूर मात्रा में फल और सब्जियां दी जा रही हैं। वहीं उन्हें सुबह और शाम की सैर भी करवाई जाती है।
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उन्होंने बताया कि हथिनियों को बाजरे की खिचड़ी के अलावा माह में एक बार सौ ग्राम तिल का तेल, प्रतिदिन आधा किलो गुड़, इसके साथ प्रति हाथी को तीस किलो सब्जी और बीस किलो फल के साथ 250 किलो हरा चारा भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाथियों का पाचन स्वस्थ रहे, इसका भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत इन्हें हल्दी, अजवाइन, काला नमक, लहसुन, अदरक का रोजाना 150 ग्राम प्रति हाथी मिश्रण दिया जाता है। चिकित्सकों की देखरेख में उन्हें लीवर टॉनिक व मल्टी विटामिन दवाइयां भी दी जा रही हैं। विदित हो कि मौसम के अनुरूप हाथियों की डाइट में बदलाव किया जाता है। उन्हें गर्मी में ठंडी चीजें और सर्दी में गर्म चीजें दी जाती हैं।

त्वचा और नाखूनों का भी रखा जाता है ख्याल
सेंटर में हथिनियों के शरीर पर तिल के तेल की मालिश की जाती है, जिससे उनकी चमड़ी नरम रहती है। नहीं तो सर्दी में त्वचा शुष्क हो जाती है। इसके साथ हथिनियों के नाखून की ट्रिमिंग की जाती है। अनदेखी पर हथिनियों के पैरों के नाखूनों में मिट्टी भर जाती है, जिससे नाखूनों में इंफेक्शन का खतरा रहता है।
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बूढ़ी चंचल को देसी घी और च्यवनप्राश
वाइड लाइफ इंस्पेक्टर जयविंद्र नेहरा ने बताया कि हाथी पुनर्वास केंद्र में चार मादा हाथी रह रही हैं। मौसम में बदलाव के साथ ही चारों के खानपान में बदलाव किया गया है। फल सब्जी के साथ उन्हें सप्लीमेंट भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बूढ़ी हथिनी चंचल के स्वास्थ्य को देखते हुए उसे देसी घी के साथ च्यवनप्राश भी दिया जा रहा है।
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