फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: अस्थमा के रोगी धूल और परफ्यूम से रखें दूरी

Tue, 05 May 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
जिला अस्पताल में बुजुर्ग का रक्तचाप चेक करतीं कर्मचारी। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। जिले में अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि अस्थमा है तो धूल और धुआं से बचाव रखें, सुपाच्य भोजन करें, धूम्रपान न करें और परफ्यूम लगाने से परहेज करें।
जिला नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज सांस संबंधी समस्याओं के साथ उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। निजी अस्पतालों में यह संख्या कई गुना अधिक बताई जा रही है। सांस लेने में दिक्कत होना, सीने में दर्द उठना, फेफड़ों में कफ का जमा हो जाना, सीने से घरघराहट की आवाज आना इसके प्रमुख लक्षण हैं। पिछले दो दिनों से चल रही तेज आंधी और मौसम में बदलाव के कारण मरीजों की संख्या में और इजाफा हुआ है।
विज्ञापन

हाल ही में हुई गेहूं की कटाई के चलते हवा में फैले भूसे के गुबार ने भी लोगों की परेशानी बढ़ाई। हालांकि हालिया बारिश से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए खतरा अभी भी बना हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार के अनुसार अस्पताल में आने वाले मरीजों में 19 से 30 वर्ष तक के युवा भी शामिल हैं। उन्होंेने बताया बदलते मौसम में सांस की नलियों में संक्रमण और सूजन के कारण बलगम अधिक बनने लगता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
विज्ञापन

परिवार में किसी सदस्य को पहले से अस्थमा है तो अन्य समें यह बीमारी होने की संभावना तीन से छह गुना तक बढ़ जाती है। धूल, धुआं, धूम्रपान, वायु प्रदूषण और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अस्थमा एक गंभीर श्वसन बीमारी है, जो हर साल कई लोगों की जान भी लेती है। मौसम में बदलाव के दौरान इसका अटैक आने का खतरा अधिक रहता है, इसलिए मरीजों को नियमित उपचार और बचाव के उपाय अपनाने चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें