यमुनानगर। मानसून में शहर को जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम व जनस्वास्थ्य विभाग के अफसर खूब जोर लगा रहे हैं, पर मामले में निचले इलाके में बसे काफी लोगों का सरकारी तंत्र पर ऐतबार नहीं दिख रहा। यह लोग अपने स्तर पर जलभराव से बचाव के इंतजाम कर रहे हैं। समस्या से निपटने के लिए लोगों ने घरों और दुकानों के आगे दीवार बना ली है।
ऐसा लाजपतनगर, विजय कॉलोनी, जसवंत कॉलोनी में हो रहा है, जहां घरों-दुकानों के आगे एक से ढाई फीट ऊंची दीवार बना ली गई हैं, जिससे हर मानसून गलियों में दो-तीन फीट तक भरने वाले बरसाती पानी की मार से बचा जाए। तीनों कॉलोनियों में सैकड़ों घरों-दुकानों के आगे ऐसी दीवारें हैं। निवासियों का आरोप है कि दो दशक में कई आईएएस व इंजीनियर आए, पर यहां जलभराव की दिक्कत दूर नहीं हुई। इसी कारण उन्हें खुद इंतजाम करने पड़े हैं। संवाद
लाजपत नगर से दानिश अंसारी ने बताया कि मानसून में गलियों में भरने वाले बारिश का पानी घरों में न घुसे, इसके लिए काफी लोगों ने घरों-दुकानों के आगे दीवारें बना दी हैं। इसके बाद भी नालियों व सीवर का गंदा पानी घरों में बैक मार घुस जाता है। इससे घरों का सामान भी खराब होता है। अब तक कई आईएएस व इंजीनियर आए, पर दो दशक में भी यह समस्या हल नहीं हो पाई है।
जसवंत कॉलोनी के शोएब ने कहा कि जुलाई-अगस्त की बारिश में एक-दो फीट जलभराव होता है, जो कई घंटों बाद उतरता है। इन हालात में घरों-दुकानों में कैद होकर रह जाते हैं। बच्चे स्कूल व बड़े नौकरी व काम पर नहीं जा पाते। बारिश, सीवरेज व नालियों के गंदे पानी की दुर्गंध में जीना दुबर हो जाता है। नगर निगम को निचले इलाकों में मानसून से पहले ही पंप सेट उपलब्ध कराने चाहिएं।
विजय कॉलोनी के विकास जैन ने बताया कि हर मानसून में निवासी एक-दो फीट तक जलभराव झेलते हैं। इसके बाद मच्छर व गंदगी जनित रोगों से ग्रस्त होते हैं। इस बार भी ऐसा होने की आशंका है। क्योंकि नाले-नालियां व सीवरेज साफ नहीं हैं। न कन्हैया साहिब चौक से जम्मू कॉलोनी तक बन रही स्टॉर्म ड्रेन पूरी बन पाई। इस पर लोगों को घरों-दुकानों के आगे दीवारें बनानी पड़ी हैं।
शहर के निचले इलाकों में जलभराव न हो, इसके लिए पुख्ता उपाय किए जा रहे हैं। मानसून से पहले तमाम प्रबंध पूरे कर लिए जाएंगे। ज्यादा जलभराव वाले इलाकों में पंप सेट व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश देंगे। - सुमन बहमनी, मेयर, नगर निगम।