विमान दुर्घटना में 45 साल पहले काल का ग्रास बने हवलदार जगमाल सिंह के बेटे और ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री सहित अन्य नेताओं को प्रेषित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा।
प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में कहा है कि यह विश्व सैन्य इतिहास का अनूठा संयोग है कि 45 साल बाद एक सैनिक का पार्थिव शरीर बर्फ में दबा मिला। ज्ञापन में सैनिक को शहीद का दर्जा देने और केंद्र, सेना और प्रदेश सरकार से जो सुविधाएं मिलती हैं वह दिलाने का अनुरोध किया गया है। ज्ञापन में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिक के अंतिम संस्कार स्थल पर स्मारक और पार्क बनवाने की अपील की गई।
फरवरी 1968 में सुबह चंडीगढ़ से एन-12 विमान लेह जाने के लिए सेना के 92 और वायु सेना के 6 जवानों को लेकर उड़ा था। रास्ते में मौसम खराब होने के कारण यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसी विमान हादसे में रेवाड़ी के हवलदार जगमाल सिंह भी बर्फ के नीचे दब गए। 16 अगस्त 2013 को सर्च अभियान के दौरान उनका शव मिला। तब जाकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ चार सितंबर को उनके गांव मीरपुर में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनके बेटे और रिटायर्ड फौजी रामचंद्र ने कहा कि उनके पिता को शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके लिए वे हर मोर्चे पर जंग लड़ेंगे।