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मांस दफनाने को लेकर काटा बवाल

Fri, 03 Jan 2014 11:37 PM IST
अमर उजाला, गुड़गांव
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व्यापार कर विभाग द्वारा चार दिन पहले पकड़े गए ट्रक में मिले मवेशियों के मांस को दफनाने के सवाल पर बंधवाड़ी गांव के लोगों ने शुक्रवार को बवाल काटा। उन्होंने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें दो पुलिस वालों सहित तीन लोग घायल हो गए।
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इसके चलते गुड़गांव-फरीदाबाद एक्सप्रेसवे पर घंटों जाम लगा रहा। इस संवेदनशील मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में उपायुक्त ने आयकर विभाग के ईटीओ और इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि गुड़गांव-फरीदाबाद रोड स्थित बंधवाड़ी के कूड़ा निस्तारण प्लांट के निकट जंगल में दफनाने के लिए मवेशियों के मांस से भरे जिस ट्रक को वहां लाया गया था, उसमें कुछ जिंदा कमजोर पशु भी थे।
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दफनाने के क्रम में कहीं कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए वहां एक पीसीआर भी तैनात की गई थी। बताते हैं कि इसकी जानकारी बंधवाड़ी गांव के लोगों को मिल गई और वे मौके पर बड़ी संख्या में पहुंच गए।

उनकी अगुवाई इनेलो नेता अनंतराम तंवर कर रहे थे। पहले तो ग्रामीणों ने वहां मौजूद पुलिस एवं प्रशासन के लोगों को खदेड़ दिया। इसके बाद ग्वाल पहाड़ी चौकी के ईस्ट जोन की पुलिस मौके पर पहुंच गई।

इसके बाद जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर मांस को दुबारा दफनाने का प्रयास किया, लेकिन गांव वाले वहां फिर आ गए और इसका विरोध करने लगे। उन्होंने पुलिस पर पथराव भी किया, जिसमें दो पुलिस वाले व एक फोटोग्राफर घायल हो गए।
स्थिति तनावपूर्ण देखते हुए फरीदाबाद व गुड़गांव पुलिस कमिश्नरी के विभिन्न थानों से वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल को बुला लिया गया। बाद में वहां पंचायत हुई, जिसका नेतृत्व इनेलो नेता अनंतराम तंवर ने किया।

एसडीएम सत्येंद्र दुहन, डीसीपी (ईस्ट) नाजनीन भसीन, डीसीपी (वेस्ट) सुरेंद्र पाल, एसीपी (पालम विहार) अशोक बख्शी आदि गांव वालों को समझा-बुझाकर किसी तरह मांस दफनाने में सफल रहे। जो मवेशी जीवित थे उन्हें पशु अस्पताल साढराणा भेज दिया गया।

इस बीच करीब चार घंटे तक एक्सप्रेसवे बाधित रहा। उपायुक्त शेखर विद्यार्थी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए व्यापार कर विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर जांच के आदेश दिए हैं। उन पर आरोप है कि चार दिन पहले ट्रक पकड़ने के बाद कार्रवाई करने में इतनी देरी की।

टोल कंपनी को चार लाख का नुकसान
गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर आने-जाने वाले वाहनों का सिलसिला दोपहर दो बजे तक चल रहा था, जिसके बाद टोल की 14 खिड़कियों पर सन्नाटा पसर गया। टोल कंपनी में काम करने वाले युवकों ने फोन करके गांव वालों को पुलिस की निगरानी में जानवरों से लदा ट्रक जाने की बात बताई। टोल कर्मी प्रवेश कुमार की मानें तो टोल दो बजे के बाद बंद हो गया, जोकि साढ़े छह बजे चालू हुआ। रोज इस समय हजारों वाहन निकलते हैं। औसतन टोल कंपनी को चार लाख रुपये का नुकसान हुआ है। टोल कंपनी की ओर से किसी भी तरह के वाहनों को नहीं निकाला जा रहा था। गांव वालों ने टोल के सामने बैरिकेड लगवा दिया था।
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