अगर विभिन्न प्रदेशों के व्यंजनों को खाने का शौक रखते हैं तो शीतला सरस मेले में आक सकते हैं। यहां एक साथ कई प्रदेशों के व्यंजनों का लुत्फ उठाने के साथ वहां के पारंपरिक पकवानों का स्वाद भी ले सकते हैं।
यहां कश्मीर के कहवा से लेकर बिहार का लिट्टी चोखा, राजस्थान का दाल-बाटी-चूरमा, पंजाब के मक्के की रोटी व सरसों का साग और दक्षिण भारत के कई स्वादिष्ट व्यंजनों की महक लोगों को खींच रही है।
दाल-बाटी-चूरमा के साथ लिट्टी चोखा लोगों की पहली पसंद है। पेय के शौकीन कश्मीर के कहवे को खास तौर पर पसंद कर रहे हैं।
मेले में खरीदारी के साथ लोग खाने-पीने का भरपूर लुत्फ उठा रहे हैं। दिन से लेकर रात तक जितनी भीड़ खरीदारी के लिए दूसरी स्टालों पर जमा रहती है, उतनी ही भीड़ खाने-पीने के स्टालों पर उमड़ रही है।
राजस्थान के अलग-अलग तरह के व्यंजनों की सात स्टॉल मेले में लगी हैं। जबकि बिहार का लिट्टी चोखा, केरल के इडली-डोसा और पंजाब की मक्के की रोटी और सरसों के साग के शौकीनों के लिए एक-एक स्टाल है।
एक बार पीकर देखें कहवा
कश्मीर के कहवे से साइबर सिटी वासियों को रूबरू कराने आए मोहम्मद मकबूल और शमीमा कहते हैं कि यह खास पेय सर्दी और गर्मी में अलग-अलग फ्लेवर में बनाया जाता है। इसकी रंगत गुलाबी होती है। आमतौर पर इसका स्वाद नमकीन होता है। स्थानीय भाषा में इसे नून चाय भी कहा जाता है। गर्मी में नींबू कहवे को पसंद किया जाता है तो सर्दी में बादाम वाले कहवे को लोग पसंद करते हैं। अगर कोई मीठी चाय का शौकीन है तो उसके लिए नमक की जगह चीनी इस्तेमाल की जाती है। यह देसी चाय की पत्तियों से बनाई जाती है। यह सर्दी भगाने में काफी मददगार होती है। रोजे के दिनों में इसका क्रेज अधिक रहता है। अधिकांश रोजेदार इस चाय को पसंद करते हैं। इसमें 35 प्रकार के मेवे और मसाले डाले जाते हैं। शमीमा कहती है कि अगर कोई इसे घर बनाना चाहे तो बना सकता है। इसके मसाले उनके पास उपलब्ध हैं।