यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हड़ताल के चलते बुधवार को शहर भर की शाखाओं में कामकाज ठप रहा। इसके चलते लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
जिले की बैंक शाखाओं में करीब 100 करोड़ का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। करोड़ों के चेक क्लीयरेंस न होने के कारण अटक गए हैं। बैंक कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर नीलम-बाटा रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर के सामने धरना दिया।
सुबह से शहर की सरकारी बैंकों की करीब सवा सौ शाखाएं नहीं खुलीं। बैंकों के आगे हड़ताल की सूचना लगाई गई थी। हड़ताल के चलते एटीएम से उन लोगों को बहुत सहारा मिला, जिन्हें की नगदी की आवश्यकता थी। निजी क्षेत्र के सभी बैंक खुले रहे।
हरियाणा बैंक एंप्लायज फेडरेशन के चेयरमैन भोले सिंह और सचिव केआर शर्मा ने कहा कि बैंकिंग रिफार्म के बहाने कारपोरेट घरानों को बैंक लाइसेंस दिए जा रहे हैं, जो ठीक नहीं है। यदि उद्योगपति बैंकों को ठीक से चला पाते तो 1969 में निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण नहीं होता।
उन्होंने कहा कि सरकारी बैंक कर्मियों का वेतन समझौता एक साल से लंबित है। इस पर सरकार लगातार टालमटोल का रवैया अपना रही है। इसलिए कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है और उन्हें हड़ताल करने पर विवश होना पड़ा। धरने पर बैठने वालों में सुशील गुलाटी, आरएस राघव, आरएस चौहान, जेएस मेनन, जगदीश अरोड़ा, सुनील तपन, ओम प्रकाश बेदी, रविंद्र गर्ग, शमशेर सिंह, गनन कुमार और रामआसरे शामिल रहे।