हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को झज्जर जिले के डावला में स्टेडियम की भूमि से कब्जा हटवाने की प्रक्रिया शुरू की।
एसडीएम प्रदीप सिंह और डीएसपी सुखबीर फौगाट ने भारी पुलिस बल के साथ कब्जा हटवाया। इधर, ग्रामीणों का कहना है कि गांव की शामलात भूमि पर कई लोगों ने कब्जा जमा रखा है।
प्रशासन अगर कब्जा छुड़वाना ही चाहता है तो पूरी तरह से हटवाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो उनके साथ अन्याय होगा।
एसडीएम प्रदीप सिंह ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने इस भूमि पर अपना दावा जताते हुए निचली अदालत में केस कर रखा था, मगर वहां पर केस हार जाने के बाद वे लोग ऊपरी अदालत में चले गए।
अदालत में वे कोई सबूत नहीं दे सके। इसके बाद भूमि से कब्जा हटवाने का निर्णय लिया गया। कुछ छह एकड़ भूमि पर खेल स्टेडियम बनाया जाना है, जिसके लिए प्रक्रिया शुरू है।
सीएम ने कहा था, कब्जों पर कदम उठाया जाए
गांव के एक पंच का कहना है कि मुख्यमंत्री हुड्डा ने डावला में खेल स्टेडियम बनाने की घोषणा पांच साल पहले की थी।
सीएम ने एक रैली में कब्जों पर कदम उठाने को कहा था, लेकिन स्टेडियम के लिए छह एकड़ भूमि पर गांव के लोग ही काबिज थे।
लिहाजा, मुख्यमंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाना मुश्किल हुआ। ग्रामीणों के केस हार जाने के बाद प्रशासन ने कब्जा हटवाने की कार्रवाई शुरू की।
कब्जे हटाने में भेदभाव का आरोप
गांव की महिला सरोज ने आरोप लगाया कि कब्जे हटवाने में भेदभाव किया जा रहा है।
गांव की अन्य भूमि पर भी लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं, लेकिन उन्हें नहीं हटवाया जा रहा है।
अगर सभी कब्जों को हटवाया जाए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी।
वह खुद स्टेडियम के लिए अपनी ओर से पांच लाख रुपये का योगदान करेगी।