हजारों गेस्ट टीचरों ने बुधवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री का आवास दिनभर घेरे रखा। तब मुख्यमंत्री ने उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया।
गेस्ट टीचरों के दिल्ली चले जाने के कारण बुधवार को स्कूलों में टीचरों की संख्या काफी कम रही।
दिल्ली में जंतर-मंतर पर गेस्ट टीचरों के 11 प्रतिनिधि आमरण अनशन पर बैठे हैं।
बुधवार को उनका अनशन 11वें दिन में पहुंच गया था।
गेस्ट टीचरों के प्रधान राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि बुधवार को पहले तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आवास का घेराव किया जाना था, लेकिन वे दिल्ली से बाहर थे।
इसलिए गेस्ट टीचरों ने सीएम आवास का घेराव करने का फैसला किया।
शास्त्री ने दावा किया कि करीब दस हजार गेस्ट टीचर सीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे रहे। उनमें करीब तीन हजार महिला गेस्ट टीचर भी शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले बातचीत के लिए यह कहकर मना कर दिया था कि अनशन समाप्त करो, टेंट उखाड़ो, तब बातचीत करेंगे। मगर, बुधवार को सीएम आवास का घेराव करने के बाद मुख्यमंत्री के दिल्ली कार्यालय सचिव सूर्यदेव दहिया ने शाम को आवास के बाहर बैठे गेस्ट टीचरों से कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें 20 फरवरी को बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुलाया है।
इसके बाद गेस्ट टीचरों ने सीएम आवास के बाहर प्रदर्शन खत्म कर दिया और जंतर-मंतर चले गए। अब उनकी निगाहें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बातचीत पर टिक गई हैं।
लगे थे 16 हजार गेस्ट टीचर
वर्ष 2006 में स्कूल टीचरों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए गेस्ट टीचर रखे गए थे। शुरू में पीरियड के अनुसार इन्हें पढ़ाई करवानी थी। मगर, टीचरों की कमी के कारण गेस्ट टीचर पूरा दिन पढ़ाई करवाने लगे।
उनका मानदेय मासिक कर दिया गया। उन्होंने रेगुलर करने की मांग की।
मामला अदालत पहुंच गया तो अदालत ने रेगुलर करने से मना कर दिया और भविष्य में गेस्ट टीचर रखने पर रोक लग गई।
इस समय करीब 16 हजार गेस्ट टीचर कार्यरत हैं।
इनमें से कुछ की स्थाई नियुक्ति हो सकती है, मगर उसका पता शिक्षक भर्ती परिणाम के बाद पता चलेगा। नौ साल से कार्यरत इन गेस्ट टीचरों ने रेगुलर करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए आमरण अनशन शुरू किया है। हालांकि, सरकार उनका मानदेय बढ़ाती रही है।
उन्हें सरकार ने गेस्ट के बजाए कांट्रैक्ट पर रख लिया था, ताकि रेगुलर करते समय कोई हल निकल जाए।