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शाम पांच बजे बाजार बंद कराने के विरोध में व्यापारियों ने किया प्रदर्शन

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लघु सचिवालय में एसडीएम शशि वसुंधरा को ज्ञापन सौंपते जिला व्यापार मंडल के पदाधिकारी। संवाद - फोटो : Sonipat
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मार्केट को शाम पांच बजे बंद कराने के आदेश के विरोध में व्यापारियों ने गीता भवन चौक पर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला व्यापार मंडल के नेतृत्व में व्यापारियों ने लघु सचिवालय पहुंच समय की पाबंदी लगाने का विरोध जताया। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम शशि वसुंधरा को मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें सरकार के 5 बजे मार्केट बंद करने के आदेश को वापस लेने की मांग की।
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व्यापारियों ने कहा कि सोनीपत में अभी इस महामारी का ज्यादा प्रकोप नहीं है। केंद्र सरकार पंजाब और यूपी की रैलियों में भीड़ पर अंकुश लगाने के बजाय व्यापारियों पर पाबंदी लगा रही है। व्यापारियों ने कहा कि वे अपनी दुकानों पर कोरोना के सभी नियमों का पालन करने को तैयार हैं, फिर भी हर बार व्यापारी को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। व्यापारियों ने कहा कि वे पहले जाट आंदोलन, फिर कोरोना, फिर किसान आंदोलन, उसके बाद पर्यावरण प्रदूषण और अब दोबारा कोरोना के कारण उनके काम-धंधे प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों को तनख्वाह मिल जाती है, गरीब आदमी को मुफ्त राशन, कुछ को सब्सिडी, व्यापारी को ही अब तक कुछ नहीं मिला। जिला व्यापार मंडल मांग करता है कि व्यापारियों को भी बंद के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए। बंद के दौरान बैंक ब्याज, बिजली बिल, बच्चों की फीस, दुकान का किराया सब माफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समय की पाबंदी लगेगी तो दुकानों पर भीड़ बढ़ेगी। इसलिए समय की पाबंदी न लगाई जाए।
इस दौरान एसपी के नाम भी ज्ञापन दिया गया, जिसमें रविवार को शहर में जिस तरह से पुलिस की गाड़ियों द्वारा सायरन बजाते हुए मार्च निकाला गया था, उसे न दोहराने की अपील की गई। इस दौरान संजय सिंगला, संजय वर्मा, सुशील स्याल, रविंद्र सरोहा, परिमल कुमार, राकेश चोपड़ा, यशपाल अरोड़ा, नरेंद्र धवन, हिमांशु कुकरेजा, नवीन कुमार, राम कुमार मलिक, बिटू जैन, अमित शर्मा, दिनेश कुच्छल, पवन मौजूद रहे।
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व्यापारियों को बर्बाद करने पर तुली सरकार : विमल किशोर
जिला उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष विमल किशोर ने कहा कि सरकार भीड़ पर अंकुश लगाने व कोरोना नियमों का पालन करवाने के बजाय व्यापारियों को बर्बाद करने पर तुली है। यही कारण है कि कोरोना के नाम पर लगातार दो तीन वर्षों से महंगाई व मंदी की मार झेल रहे व्यापारियों पर अंकुश लगाकर उत्पीड़न कर रही है।
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