गांव बड़ौली की अब सूरत बदलेगी। मोतीलाल नेहरू खेलकूद स्कूल राई ने बड़ौली गांव को गोद लिया है। यह राई से भाजपा विधायक मोहनलाल कौशिक का पैतृक गांव है। स्कूल गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के साथ यहां के युवाओं को प्रशिक्षण भी देगा और उन्हें शिक्षा के साथ खेलों के प्रति भी जागरूक करेगा। राई खेलकूद स्कूल के प्राचार्य एवं निदेशक कर्नल अशोक मोर ने वीरवार को गांव का दौरा किया। उनके साथ स्कूल शिक्षक व खेलों के कोच भी मौजूद रहे।
कर्नल अशोक मोर ने कहा कि राज्य सरकार ने क्लास वन अधिकारियों को एक-एक गांव गोद लेने के निर्देश दिए हैं। सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के अलावा एनआरआई के लिए भी इसकी योजना है। गांव के बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए स्कूल प्रबंधन ने यह कदम उठाया है। स्कूलों के शिक्षकों जहां गांव के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जागरूक करेंगे, वहीं उनकी कोचिंग की भी सुविधा होगी।
सप्ताह में एक दिन गांव में जाएंगे कोच
कर्नल अशोक मोर ने कहा कि विभिन्न खेलों के कोच की ड्यूटी रहेगी कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन गांव में लगाएंगे और युवाओं को खेलों के प्रति जागरूक करेंगे। गांव के युवाओं को नशे से दूर रखने में भी स्कूल अहम भूमिका निभाएगा। इसके तहत गांव में विभिन्न प्रकार की खेल प्रतियोगिताएं तथा प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी समय-समय पर स्कूल द्वारा गांवों में करवाया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी को संस्कृति के बारे में पता लग सके।
जानकारी केंद्र स्थापित किया जाएगा
कर्नल अशोक मोर के गांव दौरे के दौरान गांव के निवर्तमान सरपंच सहित कई ग्रामीण तथा 10वी से 12वीं तक के विद्यार्थी भी मौजूद रहे। बड़ौली स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्पोर्ट्स स्कूल द्वारा अगले दस दिन में जानकारी केंद्र स्थापित किया जाएगा। गांव में हरियाली को बढ़ाने के लिए स्कूल द्वारा मानसून के दौरान विशेष पौधरोपण भी किया जाएगा। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए भी स्कूल द्वारा समय-समय पर कार्यक्रम किए जाएंगे।
युवाओं को राह दिखाएगा स्कूल : कर्नल
कर्नल अशोक मोर ने कहा कि स्कूल युवाओं को दिखाएगा कि पढ़ाई के बाद युवाओं को किस सेक्टर में आगे जाना है, इसके लिए भी स्कूल गाइड की तरह काम करेगा। सेनाओं, रेलवे, केंद्र व राज्य सरकारों के विभिन्न नौकरियों, खुद के स्टार्टअप को लेकर भी स्कूल प्रबंधन द्वारा गांव के युवाओं की मदद की जाएगी। गांव के युवाओं का किन खेलों के प्रति रुझान है, इसका पता लगाने के बाद स्कूल के कोच युवाओं को खेलों का प्रशिक्षण भी देंगे।