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मौसम का मिजाज बदला, दिनभर बादल छाने के बाद देर शाम हुई बूंदाबांदी

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सोनीपत। जिले में रविवार को पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम का मिजाज बदल गया। सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और वातावरण में हल्का कोहरा छाया रहा। शाम को पूर्वी ठंडी हवाओं के साथ जिले के कई क्षेत्रों में बूंदाबांदी हुई। वहीं मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी के आसार भी बने रहेंगे।
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शीतलहर के कारण जिलावासियों को कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ा था। चार दिन से दिनभर धूप खिलने से अधिकतम तापमान एक बार फिर से 20 डिग्री से ऊपर पहुंच गया था। जिससे लोगों को ठंड से हल्की राहत मिली थी। परंतु शनिवार शाम से ही जिले में मौसम का मिजाज बदलने लगा था और रविवार सुबह आसमान में बादल छा गए। सुबह के करीब 11 बजे के बाद कुछ समय के लिए हल्की धूप निकली, परंतु दोपहर बाद आसमान में फिर से बादल छा गए और कई स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई।
मौसम विभाग ने एक सप्ताह पहले पश्चिमी विक्षोभ को लेकर अलर्ट जारी किया था। विशेषज्ञों के अनुसार रविवार से मंगलवार तक तीन दिन तक बूंदाबांदी होने का पूर्वानुमान है। गेहूं की फसल में ज्यादातर किसान पहली सिंचाई कर रहे हैं। बारिश हो जाती है तो गेहूं की फसल की सिंचाई हो जाएगी।
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सर्दी बढ़ने से झेलनी होगी परेशानी
बारिश पड़ने से तापमान में कमी आने का पूर्वानुमान विभाग की ओर से जारी किया गया है। न्यूनतम और अधिकतम तापमान दोनों में कमी आएगी। इससे लोगों को दिन-रात सर्दी का सामना करना पड़ेगा। सर्दी में लोगों को पर्याप्त कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को खुली हवा के सीधे संपर्क में आने से बचाने की जरूरत है। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस रहा।
हवा एक बार फिर से हुई प्रदूषित
कई दिन से हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था। धूल और धुएं के कणों की भरमार से खुली हवा में सांस लेने से परेशानी हो रही थी। वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ने के साथ ही पीएम-10 और पीएम-2.5 का स्तर भी खतरनाक बना हुआ था। रविवार को एक्यूआई 365 दर्ज किया गया है। पीएम-10 जहां 354 रहा वहीं पीएम-2.5 का स्तर 272 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बारिश होने से हवा की गुणवत्ता में सुधार हो जाएगा।
वर्जन
मौसम में बदलाव का अलर्ट कंट्रोल रूम से पहले ही जारी कर दिया गया था। यह तीन दिन का विक्षोभ है। वर्तमान की बारिश पर्यावरण के लिए लाभकारी है। इसका लाभ फसलों को भी मिलेगा। दिसंबर खत्म होने को है। इस समय तापमान में कमी होना भी जरूरी है। बारिश होने से तापमान कम होने के बावजूद पाला गिरना बंद हो जाएगा।
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- डॉ. प्रेमदीप सिंह, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र सोनीपत
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