सोनीपत। भारतीय महिला हॉकी टीम ने सोमवार सुबह जैसे ही तीन बार की चैंपियन आस्ट्रेलिया को हराया, टीवी पर मैच देख रहे दर्शक खुशी से झूम उठे। सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद खिलाड़ियों ने अपने परिजनों से वीडियो कॉल कर कहा कि अब हमारा अगला लक्ष्य देश की झोली में स्वर्ण पदक डालना है। इसी को लेकर हम सभी कड़ी मेहनत कर रही हैं। ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचने पर जिले में जश्न का माहौल रहा। टीम में शामिल खिलाड़ियों के परिजनों को दिनभर बधाइयां मिलती रहीं।
महिला हॉकी टीम में जिले की तीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। इनमें सोनीपत शहर से नेहा गोयल, निशा वारसी और गोहाना से मोनिका शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के परिजन भी लाडलियों की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे। महिला हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर कोच प्रीतम सिवाच ने मैदान पर सभी खिलाड़ियों को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।
पति के न होने के बावजूद मां सावित्री ने नेहा को आगे बढ़ाया
महिला हॉकी टीम की मिडफील्डर नेहा गोयल के ताऊ श्याम सुंदर गोयल ने बताया कि नेहा ने कड़ा संघर्ष कर यह मुकाम हासिल किया है। नेहा ने दो दिन पहले फोन पर बात कर कहा था कि सभी खिलाड़ी देश को स्वर्ण पदक दिलाने के लिए जमकर मेहनत कर रही हैं। सबका एक ही लक्ष्य है-इस बार स्वर्ण पदक लेकर ही आना है। श्याम सुंदर गोयल ने कहा कि नेहा की मां सावित्री देवी ने पति के न होने के बावजूद आर्थिक तंगी झेलते हुए अपनी तीनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दी। छोटी बेटी नेहा की हॉकी में रुचि देख उसे आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया। नेहा ने भी अपनी मां की तपस्या को सफल करते हुए ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिससे वह अपने सभी गम भूल गई। सावित्री देवी ने बताया कि नेहा को यहां तक पहुंचाने में उसकी कोच प्रीतम सिवाच का बहुत बड़ा योगदान है। प्रीतम सिवाच ने न सिर्फ नेहा को हॉकी खेलना सिखाया, बल्कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उसे कभी किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। अपने पैसों से उसे जूते, हॉकी स्टिक लाकर दी। मुझे पूरी उम्मीद है कि महिला हॉकी टीम देश को झूमने का स्वर्णिम अवसर जरूर प्रदान करेगी।
निशा ने वीडियो कॉल कर कहा, अब स्वर्ण पदक दिलाना ही लक्ष्य
महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी निशा वारसी के पिता शोहराब मोहम्मद व मां मेहरून ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लाडो यहां तक पहुंचेगी। निशा की कोच प्रीतम सिवाच ने भी उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में बड़ा योगदान दिया है। आस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने के बाद निशा ने पिता को वीडियो कॉल कर कहा कि हमारा लक्ष्य फाइनल में जगह बनाकर देश को स्वर्ण पदक दिलाना है।
शोहराब मोहम्मद ने बताया कि वह मूलरूप से मुरादाबाद (यूपी) के रहने वाले हैं। करीब पांच दशक पहले सोनीपत आकर किराये पर रहने लगे थे। दर्जी का काम कर परिवार का पालन पोषण किया। मेरी तीन बेटियां व एक बेटा है। दो बेटियों की शादी हो चुकी है, निशा तीसरे नंबर की है। वर्ष 2016 में मैं लकवाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद काम नहीं कर पाया। पत्नी मेहरून ने फैक्टरी में काम कर घर चलाने का प्रयास किया। खेल कोटे से निशा को रेलवे में नौकरी मिल गई। निशा की हॉकी की लगन ऐसी थी कि सुबह 5 बजे मैदान पर पहुंच जाती थी। दो घंटे अभ्यास कर वापस आती और स्कूल चली जाती थी। स्कूल से आने के बाद शाम को 3 बजे फिर मैदान पर पहुंच जाती थी। सभी बेटियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि यह टीम देश को स्वर्ण पदक जरूर दिलाएगी।
मेरी पोती मोनिका जरूर स्वर्ण पदक जीतेगी : चंद्रपति
गोहाना। मोनिका मलिक भारतीय टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतकर लाएगी, मोनिका के साथ ही टीम की हर खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन और मेहनत कर रही हैं। मोनिका की दादी चंद्रपति ने कहा कि मेरी पोती जरूर स्वर्ण पदक जीतकर लाएगी।
उनके गांव के साथ पूरे देश को मोनिका व टीम से स्वर्ण पदक की उम्मीद है। पदक जीतने के बाद मोनिका का पैतृक गांव गामड़ी में पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। यह कहना है मोनिका के चाचा रामकुवार मलिक का। वे सोमवार को गांव में परिजनों व ग्रामीणों के साथ महिला हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर खुशी जाहिर कर रहे थे।
सात साल की उम्र चाचा रामकुवार ने मोनिका को लिया था गोद
रामकुवार मलिक ने बताया कि मोनिका उसके बड़े भाई तकदीर की बेटी है, जिसे उन्होंने सात साल की उम्र में ही गोद ले लिया था। वह उन्हें चाचा की बजाय छोटे पापा कहती है। मोनिका को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था। वह आज जिस मुकाम पर पहुंची है, उसके पीछे उसकी कड़ी मेहनत है। उसने अपने परिवार व गांव की नहीं, बल्कि दुनियाभर में पहचान बनाई है। मोनिका के साथ ही अन्य सभी बेटियों के बेहतर प्रदर्शन से ही टीम सेमीफाइनल में पहुंची है। सभी को उम्मीद है कि टीम स्वर्ण पदक जीतकर स्वदेश लौटेगी। इस दौरान ताई कमलेश, चाची सावित्री, भतीजी दीक्षा, भतीजा सेतू के अलावा राकेश व मंजीत मौजूद रहे। संवाद
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सुमित के पिता बोले - मजदूरी कर बेटे को हॉकी खिलाड़ी बनाया
जिले के हॉकी खिलाड़ी सुमित के घर भी खुशी का माहौल
पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक में सेमीफाइनल में पहुंचकर एक लंबे इंतजार को खत्म किया है। जिले के गांव कुराड़ निवासी सुमित हॉकी टीम में शामिल है। टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने पर परिवार में खुशी का माहौल है। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मना रहे हैं। सुमित के भाई अमित का कहना है कि पदक जीतकर वापस आने पर गांव में सुमित का जोरदार स्वागत किया जाएगा। सुमित के पिता प्रताप ने बताया कि मजदूरी कर बेटे को हॉकी खिलाड़ी बनाया है। उसकी मेहनत का ही परिणाम है कि वह ओलंपिक में खेल रही टीम का हिस्सा है। हम चाहते हैं कि वह पदक लेकर लौटे।
हॉकी ग्राउंड में बांटी मिठाई, जमकर मनाईं खुशियां
आस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफाइनल में पहुंची महिला हॉकी टीम की तीन खिलाड़ी सोनीपत से हैं। इनमें से दो खिलाड़ी नेहा गोयल व निशा वारसी शहर के औद्योगिक क्षेत्र स्थित हॉकी ग्राउंड में अभ्यास कर बुलंदी पर पहुंची हैं। दोनों खिलाड़ियों की प्रशिक्षक एवं महिला हॉकी टीम की पूर्व खिलाड़ी प्रीतम सिवाच के नेतृत्व में सोमवार शाम को हॉकी ग्राउंड में लड्डू बांटे। हॉकी ग्राउंड की बेटियों ने कहा कि टीम देश को सोना दिलाएगी।
पहले आस्ट्रेलिया को हराया, अब अर्जेंटीना की बारी : प्रीतम सिवाच
हमारी खिलाड़ी जब यहां से चली थीं तो एक ही बात कही थी कि पहले मैच से ही अच्छा खेलना। रणनीति थी कि दो मैच तो जीतने ही हैं। हमारी टीम बेहतर खेली है। उनके खेल को देखकर ही लग रहा था कि पूरा जी-जान लगाकर खेल रही हैं। टीम का अगला मुकाबला अर्जेंटीना से है, जो बेहतर टीम है, लेकिन आस्ट्रेलिया से अच्छी नहीं है। अब तक टीम ने बेहतर खेल दिखाया है। पहले आस्ट्रेलिया को हराया, अब अर्जेंटीना की बारी है। खिलाड़ियों के जुझारूपन को देखते हुए लगता है कि टीम देश के लिए स्वर्ण पदक लेकर आएगी।
- प्रीतम सिवाच, पूर्व कप्तान एवं कोच, भारतीय महिला हॉकी टीम