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सुमित के प्रथम गुरु बोले - ओलंपिक का पदक जिताकर दी गुरु दक्षिणा

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प्रशिक्षक नरेश आंतिल - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। गांव के खेल मैदान से हॉकी में ओलंपिक तक का सफर तय करने वाले सुमित को इस मुकाम तक ले जाने में उनके प्रथम गुुरु नरेश आंतिल की कड़ी मेहनत भी शामिल है। दिल्ली के नरेला स्थित सरकारी स्कूल में प्राध्यापक गांव कुराड़ निवासी नरेश आंतिल गांव के स्टेडियम में युवाओं को हॉकी की बारीकी समझाते थे। उन्होंने कहा कि आज ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता टीम में खेलते हुए सुमित ने गांव का नाम ऊंचा किया है। सुमित ने उन्हें यही गुरु दक्षिणा दी है।
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प्रशिक्षक नरेश आंतिल ने बताया कि महज आठ साल की उम्र में जब सुमित मेरे पास हॉकी सीखने पहुंचा तो उनके पास जूते तक नहीं थे। मैंने ही सुमित को जूते व स्टिक देकर मैदान में उतारा था।
प्रशिक्षक नरेश आंतिल ने बताया कि सुमित ने हॉकी टीम में खेलते हुए अपने माता-पिता व गांव कुराड़ इब्राहिमपुर का नाम देश में रोशन किया है। हॉकी खिलाड़ी सुमित ने आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत की। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होते हुए भी सुमित का जुनून हॉकी के प्रति कभी कम नहीं हुआ। गांव के छोटे मैदान से छोटे डंडे से हॉकी खेलना शुरू किया। उसके बाद पैसे का जुगाड़ करते हुए उसने हॉकी लेकर प्रशिक्षण लिया। उसने खंड, जिला, राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलते हुए टीम को चैंपियन बनाया।
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अब गांव से सुमित जैसे खिलाड़ियों को तैयार किया जाएगा। इसके लिए पंचायत की जमीन पर बड़ा हॉकी स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा, ताकि गांव के खिलाड़ी सुमित की तरह मेहनत करते हुए ओलंपिक तक का सफर करके देश का नाम रोशन कर सके। (संवाद)
गांव से पहले भी निकले हैं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
प्रशिक्षक नरेश आंतिल ने बताया कि उनके गांव ने हॉकी में पहले भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। मंदीप आंतिल व उनके भाई संदीप आंतिल के साथ ही गांव के नवीन आंतिल और विशाल ने गांव को पहचान दी है। अब सुमित ने गांव का नाम बुलंदी पर पहुंचा दिया है।
ओडिशा में जीता था 25 लाख रुपये का पुरस्कार
नरेश आंतिल ने बताया कि सुमित ने वर्ष 2017-18 में ओडिशा में हुई एचआईएल प्रतियोगिता में बेस्ट प्लेयर का खिलाफ जीता था, जिसमें उसे 25 लाख रुपये का इनाम मिला था। खेत प्रतिभा के धनी सुमित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
...और जब इनाम की राशि लाकर प्रशिक्षक को दी
नरेश आंतिल बताते हैं कि वर्ष 2006 में सुमित ने एक स्थानीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। जहां पर उसे एक हजार रुपये का इनाम मिला था। वह इनामी राशि को लेकर अपने घर जाने की बजाय उनके पास आया और उन्हें वह राशि दे दी। जब उसने कहा कि बेटा यह राशि अपनी मां को देना तो बोला कि गुरु जी यह तो आपकी होनी चाहिए। वह उसकी ईमानदारी देखकर कायल हो गए। तब उसे राशि वापस देकर कहा था कि बेटा यह खिलाड़ी की मेहनत का फल है।
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