सोनीपत। मुरथल के ढाबों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी के लिए सात साल पहले शुरू हुआ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। वर्ष 2016 में उन ढाबों के पानी की निकासी के लिए सरकार से मंजूरी मिलने के बाद 2017 में इस पर काम भी शुरू हो गया था। करीब 7.5 करोड़ रुपये से दो साल में सीवर लाइन बिछाने व एसटीपी चालू करने का काम पूरा किया जाना था, मगर निर्माण में देरी की वजह से लागत बढ़कर अब 9.5 करोड़ रुपये हो गई है। लेकिन अब इसके जल्द चालू होने की उम्मीद है।
मुरथल विश्वविद्यालय के पीछे एसटीपी चालू होने के बाद ढाबों, विश्वविद्यालय, कुराड़, आरके कॉलोनी समेत आसपास के गांवों के लोगों की परेशानी दूर होगी। मुरथल के होटलों व ढाबों के दूषित पानी से उनको निजात मिल सकेगी। नए साल में मार्च तक एसटीपी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। एसटीपी से पानी को शोधित कर आगे भेजने से भूजल दूषित नहीं होगा। अभी तक वहां का भूजल दूषित हो रहा है और उसका सबसे बड़ा कारण होटल व ढाबों का दूषित पानी जमीन में छोड़ा जाना है।
सीवरलाइन व एसटीपी के निर्माण के लिए मुरथल ढाबा एसोसिएशन के सदस्य 15 वर्ष से मांग कर रहे थे। नगर निगम की ओर से वर्ष 2017 में मुरथल के ढाबों के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के साथ 1008 मीटर सीवरलाइन डालने का काम शुरू कराया गया था, ताकि ढाबों के पानी की निकासी बेहतर तरीके से हो सके। इस सीवरलाइन को 9.5 करोड़ रुपये की लागत से मुरथल विश्वविद्यालय के पीछे बन रहे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डाला जाएगा। इस प्लांट की क्षमता तीन एमएलटी (न्यूनतम तरल निर्वहन) है। नगर निगम ने इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य 31 मार्च निर्धारित किया है। एसटीपी चालू होने के बाद ढाबा संचालकों को काफी राहत मिल सकेगी।
ट्रैफिक पार्क में जमीन जाने के बाद सीवरलाइन की लंबाई बढ़ी
मुरथल विश्वविद्यालय के पीछे बनने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एवं रिसर्च (ट्रैफिक पार्क) के लिए परिवहन विभाग को साढ़े 16 एकड़ जमीन दी गई है। इसके चलते सीवरलाइन की लंबाई करीब 300 मीटर और बढ़ानी पड़ी। अब यह 1308 मीटर में बिछाई जा रही है। इसके चलते सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करने में देरी हुई।
मुरथल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में पहुंचाया जाएगा पानी
मुरथल के ढाबों से निकलने वाले पानी को शोधित कर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में इस्तेमाल किया जाएगा। ढाबों का शोधित पानी प्लांट में कूड़े को गलाने में इस्तेमाल होगा। जेबीएम कंपनी की ओर से ताजपुर रोड पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया है। इसमें सोनीपत, गन्नौर, पानीपत व समालखा शहर के कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। इसी कूड़े से बिजली बनाई जा रही है। कूड़े को गलाने के लिए ज्यादा मात्रा में पानी की आवश्यकता रहती है। यह प्लांट उस जगह लगा रखा है, जहां भूजल स्तर में गिरावट आने की आशंका रहती है। इस स्थिति को देखते हुए ढाबों का पानी प्लांट तक पहुंचाने का निर्णय लिया था। जेबीएम कंपनी की ओर से प्लांट से लेकर मुरथल एसटीपी तक साढ़े सात किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डाली जाएगी। इसके बाद ढाबों का पानी प्लांट तक पहुंचने के बाद कंपनी को कूड़ा गलाने में पानी की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।
वर्जन
मुरथल ढाबों के पानी की निकासी के लिए मार्च तक एसटीपी का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके चालू होने से पानी की निकासी बेहतर हो सकेगी। एसटीपी से पानी का शोधन करने के बाद ताजपुर रोड पर स्थापित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। -विशाल गर्ग, अधीक्षण अभियंता नगर निगम।