यूक्रेन में बिगड़ते जा रहे हालात के बीच रविवार को जिले के पांच और विद्यार्थियों की घर वापसी हुई है। इनमें गांव खेवड़ा निवासी मोहिनू व चंचल, ककरोई निवासी प्रिया, खेड़ी गुज्जर निवासी प्रिंस व एक अन्य शामिल हैं। जान जोखिम में डालकर घर लौटे अपने बच्चों को लेने के लिए परिजन सुबह ही दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंच गए थे। यहां परिजन अपने बच्चों को गले लगाकर भावुक हो उठे। बच्चों की सकुशल घर वापसी के लिए परिजनों ने सरकार व जिला प्रशासन का धन्यवाद किया और यूक्रेन में फंसे अन्य विद्यार्थियों को भी जल्द वापस लाने की मांग की।
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जिले के 106 विद्यार्थी गए थे। रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद से अब तक 11 दिनों में 90 विद्यार्थियों को सकुशल घर वापस लाया जा चुका है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अन्य 16 विद्यार्थियों की भी जल्द वापसी होगी। उपायुक्त ललित सिवाच ने विद्यार्थियों के परिजनों को आश्वासन देते हुए कहा कि सरकार व जिला प्रशासन आप लोगों के साथ है। विद्यार्थियों की वापसी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र व राज्य सरकारें ऑपरेशन गंगा के तहत जोरों से कार्य कर रही है।
खरखौदा में अब तक 16 विद्यार्थियों की हुई वापसी
उपायुक्त ललित सिवाच ने कहा कि खरखौदा उपमंडल के अब तक 16 विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी हुई है। इनमें खरखौदा शहर की रहने वाली पूजा, इंद्रवेश, सिद्धार्थ, शबनम, सचिन, मिनी, तरुण, सौरव और सागर शामिल हैं। इसके अलावा गांव सिसाना के विपुण, गांव बरोणा की मेघा, गांव आनंदपुर का साहिल, गांव गोपालपुर का राहुल, गांव रोहणा से लक्ष्य व अमन और गांव मटिंडू से अंकित की यूक्रेन से घर वापसी हो चुकी है।
ऑनलाइन क्लासेज से मना करने के कारण नहीं आ सके घर
यूक्रेन से रविवार को घर लौटे गांव खेवड़ा निवासी मोहिनु पुत्र हवा सिंह ने बताया कि मैं एक दिसंबर 2020 को यूक्रेन गया था। वहां खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। भारतीय दूतावास ने 16 फरवरी को ही यूक्रेन छोड़ने की एडवाइजरी जारी कर दी थी, लेकिन यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन क्लासेज लगाने से इनकार कर दिया। वहीं अस्थायी नागरिकता पत्र (टेम्परेरी रेजिडेंस कार्ड) के लिए आवेदन किया था, वही भी नहीं मिला था। जिस कारण उस समय हम देश नहीं लौट सकें। बाद में फ्लाइट के टिकट बुक करवाए, लेकिन रूस के हमला करने के कारण फ्लाइट रद्द हो गई। रूस के हमले में लगातार हो रहे धमाकों के बीच 15 विद्यार्थी हॉस्टल के बंकर में सात दिन तक छिपे रहे। धमाकों की आवाज से दिल घबरा जाता था। यूनिवर्सिटी व भारतीय दूतावास की तरफ से किसी प्रकार की सहायता न मिलने पर हमने खुद ही निकलने की योजना बनाई। एक मार्च को हम बंकर से निकले और स्टेशन से ट्रेन पकड़कर 21 घंटे का सफर तय कर लवीव शहर पहुंचे। वहां से टैक्सी बुक कर पोलैंड बॉर्डर पहुंचे, जहां भारतीय दूतावास के सदस्यों ने बॉर्डर पार करवाया। कुछ दिन वहां रुके और रविवार सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे।
इकलौते बेटे की हर समय सताती थी चिंता
खेवड़ा निवासी हवा सिंह ने बताया कि वह एक किसान है। मोहिनू उनका इकलौता बेटा है। उसे डॉक्टर बनाने की इच्छा से यूक्रेन भेजा था। रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद रोजाना बेटे से संपर्क करते रहते थे। जब तक बेटा घर नहीं लौटा, तब तक उसकी कुशलता की चिंता सताती रहती थी।
जान हथेली पर लेकर निकले
खेवड़ा निवासी अधिवक्ता आनंद की पुत्री चंचल ने बताया कि वह खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी की प्रथम वर्ष की छात्रा है। दिसंबर 2020 में वह यूक्रेन गई थी। फ्लाइट रद्द होने के कारण वे नहीं लौट सके। कई दिनों तक बंकर में ही फंसे रहे। किसी प्रकार का सहयोग न मिलने पर हमने खुद ही निकलने की योजना बनाई। हमारी आंखों के सामने जगह-जगह बम धमाके होते रहे, लेकिन हम जान हथेली पर लेकर निकल पड़े। जैसे-तैसे कर रविवार को अपने घर पहुंचे।
वर्जन
यूक्रेन से सोनीपत के विद्यार्थियों की सुरक्षित घर वापसी के लिए जिला प्रशासन दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहा है, ताकि जल्द विद्यार्थियों की घर वापसी हो सके। शनिवार देर रात व रविवार को कई फ्लाइट यूक्रेन से विद्यार्थियों को भारत आई हैं। रविवार को पांच विद्यार्थियों घर वापसी हुई है।
- ललित सिवाच, उपायुक्त, सोनीपत
यूक्रेन से घर लौटी बेटी को केक खिलाकर खुशी मनाते परिजन। संवाद- फोटो : Sonipat