हरियाणा के सोनीपत के गन्नौर में बादशाही रोड पर स्थित घर के अंदर बनी फैक्टरी में कैंसर की नकली दवा बनाने के धंधे का पता लगने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) विभाग के अधिकारियों ने रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फैक्टरी की दूसरी मंजिल पर बने गोदाम में रखी फाइलों में यह रिकॉर्ड मिला है।
इसमें काफी संख्या में कच्चे बिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह नकली दवा बनाने के लिए खरीदे गए कच्चे माल के बिल हो सकते हैं। इनकी अब गहनता से जांच कराई जाएगी। इससे फैक्टरी में तैयार की जा रही नकली दवा में प्रयुक्त सामान की पहचान करने में मदद मिलेगी। कच्चे बिलों के आधार पर जांच कराई जाएगी।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम और ड्रग विभाग के गाजियाबाद, नोएडा व बुलंदशहर के अधिकारियों ने कैंसर की नकली दवा बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी थी। जिसके बाद पता लगा था कैंसर की नकली दवा सोनीपत के गन्नौर में बादशाही रोड पर स्थित आरडीएम फैक्टरी में बन रही है। यहां पर यह फैक्टरी फूड सप्लीमेंट बनाने के नाम पर चल रही थी।
जिसके बाद आरडीएम बायोटेक कंपनी से मालिक रामकुमार को भी गिरफ्तार किया था। मामले में रामकुमार समेत सात आरोपी पकड़े गए थे। इसके साथ ही करीब आठ करोड़ रुपये की नकली दवा गाजियाबाद में स्थित गोदाम से बरामद की गई थी। उसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग, ड्रग डिपार्टमेंट, जिला आयुर्वेद अधिकारी की टीम ने फैक्टरी पर संयुक्त छापा मारा था। गन्नौर की फैक्टरी से 20 कट्टों में भरा कच्चा माल बरामद किया गया था।
उसके दो सैंपल लेकर जांच को भेज दिए गए हैं। केंद्रीय अधिकारियों की टीम ने फैक्टरी का निरीक्षण किया था। दो साल पहले तक फैक्टरी मालिक भी घर में बनी फैक्टरी की पहली मंजिल पर ही परिवार संग रहता था। बाद में वह यहां से परिवार को ले गया था।
जांच में टीम को दूसरी मंजिल बने गोदाम से कुछ फाइल मिली थीं। इन फाइलों में कच्चे बिल हैं। अंदेशा है कि कैंसर की नकली दवा बनाने के लिए यह कच्चा माल अवैध तरीके से खरीदा गया है। अधिकारियों की टीम बिलों की फाइल को अपने साथ ले गई है। उसके आधार पर कच्चे माल की खरीद की जांच की जाएगी।
फैक्टरी में मिलीं थीं 30 मशीन
फैक्टरी में छापा मारने के दौरान 30 छोटी मशीन मिलीं थीं। उन्हें टीम अपने साथ ले गई थी। ग्रांइडर-मिक्सर टाइप की इन मशीनों से ही माल तैयार किया जाता था। उसके बाद इस माल को तीन या चार दिन में गाड़ी में भरकर भेजा जाता था।
फैक्टरी में जांच के दौरान मिले कच्चे माल के दो सैंपल लेकर जांच को भेज दिए गए थे। यह फैक्टरी केंद्रीय शाखा से लाइसेंस लेकर चल रही थी। मामले में आगे की कार्रवाई उनके स्तर पर की जा रही है। फैक्टरी का लाइसेंस रद्द करने की संस्तुति भेजी है। रिकॉर्ड की जांच केंद्रीय स्तर पर की जा रही है।
- वीरेंद्र सिंह गहलावत, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी