गार्डन बुक कर किए गए भोज में पहुंचे लोग। संवाद
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सोहटी गांव में वर्षों से पाली जा रही भैंस की मौत के बाद पशुपालक ने मंगलवार को उसकी सत्रहवीं का आयोजन कर अपने रिश्तेदारों व आठ गांवों के ग्रामीणों को प्रीतिभोज कराया।
दिल्ली की सीमा से सटे सोहटी गांव निवासी जयभगवान उर्फ लीलू एक किसान व पशुपालक हैं। वर्षों से पाली जा रही भिंडी भैंस की मौत पर उन्होंने न केवल उसे अपने प्लॉट में ही दफनाया, बल्कि उसकी सत्रहवीं कर नाते-रिश्तेदारों व आसपास के आठ गांवों के लोगों को प्रीतिभोज करवाया। इसके लिए एक गार्डन बुक किया गया था, जहां प्रीतिभोज करने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। किसान जयभगवान का यह काम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
वर्ष 1999 में भाई की सुसराल से तीन वर्ष की लाया था कटिया
किसान जयभगवान ने बताया कि वर्ष 1999 में उसके भाई की सुसराल से वह करीब तीन साल की कटिया लेकर आया था। कटिया का अपने बच्चों के साथ ही बड़े लाड़-प्यार से पालन-पोषण किया था। उसके बाद से अब तक उसने 21 कटिया व एक कटड़े को जन्म दिया। यह भैंस उनके परिवार के सदस्य की भांति थी। जयभगवान ने बताया कि वह सोच रहा था कि अपनी भैंस के जीवित रहते हुए उसका जीवनजग करे, लेकिन देवउठनी एकादशी के दिन अचानक से भैंस की मौत हो गई। ऐसे में उसने अब भैंस की सत्रहवीं करते हुए न केवल अपने रिश्तेदारों को प्रीतिभोज पर बुलाया, बल्कि सोहटी के साथ ही आसपास के गांवों के लोगों को भी न्योता दिया। जयभगवान ने बताया कि भिंडी भैंस की करीब 27 वर्ष की उम्र में मौत हुई थी। पशु चिकित्सक डॉ. श्रीभगवान का कहना है कि अगर सही देखभाल की जाए तो भैंस की न केवल इतनी लंबी उम्र हो सकती है, बल्कि इतनी बार बच्चे भी पैदा कर सकती है।