फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूक्रेन संकट: युद्ध से उद्योगपतियों की बढ़ी चिंता, निर्यातकों के अटके करोड़ों रुपये, बढ़ी महंगाई

Sun, 27 Feb 2022 01:43 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

युद्ध से पहले लिए गए ऑर्डर पर लागत बढ़ने से उद्योगों को नुकसान झेलना होगा। निर्यातकों को विदेशों से मिलने वाले ऑर्डरों में गिरावट आई है। युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों पर उद्योगपतियों से बातचीत की गई। 
विज्ञापन
1. विशाल गोयल, निदेशक, इंडिया ग्लोबल फूड्स, एचएसआईआईडीसी, बड़ी। 2. संजय वर्मा, चेयरमैन, जिला व्यापार मंडल। 3. राकेश देवगन, प्रधान, राई इंडस्ट्रियल एरिया मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन। 4. सुभाष गुप्ता, प्रधान, कुंडली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने उद्योगपतियों की चिंता बढ़ा दी है। युद्ध के कारण निर्यातकों के करोड़ों रुपये अटक गए हैं। यही नहीं तेल, गत्ते, लोहे, प्लास्टिक दाना सहित अन्य दामों मेें तेजी आई है। सोनीपत के उद्योगपतियों को विदेशों से मिलने वाले ऑर्डरों पर भी ब्रेक लग गया है। जो ऑर्डर पहले मिले थे, युद्ध के बाद उनकी लागत में बढ़ोतरी हो गई है।

विज्ञापन


जिससे उद्योगों को भारी नुकसान झेलना होगा। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण निर्यातकों को विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर में भी काफी गिरावट आ गई है। युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों पर जिले के उद्योगपतियों से बात की गई।

इस पर सभी ने अपने अलग-अलग विचार दिए हैं। हालांकि सभी ने यही कहा है कि युद्ध के कारण महंगाई बढ़ गई है। इससे आयात के दाम बढ़ जाएंगे, जबकि निर्यात के दामों में गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा।
विज्ञापन


युद्ध से बढ़ी महंगाई, उद्योगों को झेलना पड़ेगा नुकसान

रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद सब चीजें महंगी होने लगी हैं। पैकिंग का सामान, खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग), खाना पकाने का तले (कुकिंग ऑयल), देसी घी, लोहे के डिब्बे सब महंगे हो गए हैं। गत्ते के दाम बढ़ने से पेटियां महंगी हो गई हैं। इसके अलावा निर्यातकों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, वो सभी रेट पाबंद हैं, लेकिन अब उनकी लागत बढ़ गई है। जिससे उद्योगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। युद्ध से आयात व निर्यात पर कई प्रकार की पाबंदियां लग जाती हैं। कोरोना काल के बाद से उद्योगपतियों के सामने कंटेनर की उपलब्धता न के बराबर है। भाड़ा भी चार से छह गुना बढ़ गया है, जो आयात-निर्यात के काम को प्रभावित कर रहा है। कंटेनर की उपलब्धता ना होने से तैयार माल निर्यातक के पास 10 से 15 दिन तक पड़ा रहता है, जिस कारण माल खरीदने के लिए पार्टी तो तैयार रहती है, लेकिन माल समय पर नहीं पहुंच पाता। इसका नुकसान भी उद्योगपतियों को भुगतना पड़ रहा है। - विशाल गोयल, निदेशक, इंडिया ग्लोबल फूड्स, एचएसआईआईडीसी, बड़ी


जितना बड़ा ऑर्डर, उतना ज्यादा झेलना होगा नुकसान

रॉ मैटीरियल (कच्चा माल) के दाम पहले ही बढ़े हुए थे। रूस व यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बाद हालात ज्यादा बिगड़ेंगे। युद्ध के कारण तेल, प्लास्टिक दाना, लोहा सहित अन्य सामान सब महंगा हो गया है। युद्ध जैसे हालातों में स्थानीय लोग खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान का स्टॉक कर लेते है। यह भी महंगाई बढ़ने का बड़ा कारण है। उद्योगपतियों ने युद्ध से पहले जो ऑर्डर लिए थे, अब उनकी लागत बढ़ गई है, जिससे नुकसान झेलना पड़ेगा। जिसका जितना बड़ा ऑर्डर, उसे उतना ही अधिक नुकसान झेलना होगा। जब तक युद्ध थम नहीं जाता और हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक दूसरे देशों से भी आयात-निर्यात प्रभावित ही रहेगा। निर्यातकों को उद्योगों में निर्यात के लिए तैयार माल भी अपने पास ही रखना पड़ रहा है। इन सभी का उद्योगों पर असर पड़ रहा है। - सुभाष गुप्ता, प्रधान, कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन


युद्ध लंबा चला तो निर्यातकों को होगा नुकसान

दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध का असर अकेले भारत पर ही नहीं पूरी दुनिया पर पड़ेगा। युद्ध के कारण निर्यातकों के करोड़ों रुपये अटक गए हैं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक राशि भी नहीं मिल सकेगी। वहीं आयात-निर्यात भी पूरी तरह प्रभावित रहेगा। अगर युद्ध लंबे समय तक चला तो इसका नुकसान निर्यातकों को झेलना पड़ेगा। - राकेश देवगन, प्रधान, राई औद्योगिक क्षेत्र मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन


धान के दामों में आई गिरावट

रूस के यूक्रेन पर हमला करने से जहां महंगाई बढ़ी है। वहीं चावल का निर्यात रुक गया है, जिससे दामों में भी गिरावट आई है। धान के दाम अब 4200 प्रति क्विंटल से गिरकर 4050 तक आ गए हैं। अगर युद्ध लंबा चलता है तो दामों में और गिरावट आ सकती है। जिले में करीब 10 चावल निर्यातक हैं, जो अरबों रुपये का चावल निर्यात करते हैं। युद्ध के बाद करोड़ों रुपये अटक गए हैं। खाद्य तेल 10 से 15 रुपये तक महंगे हो गए हैं। युद्ध से जहां आयात के दामों में वृद्धि हुई है। वहीं निर्यात के दाम घट गए हैं, इसका मुख्य कारण डिमांड कम होना है। - संजय वर्मा, चेयरमैन, जिला व्यापार मंडल

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें