नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में दाखिला देने की मांग लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। गुस्साए अभिभावकों ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद उनके बच्चों को अलॉट हुए स्कूलों में दाखिला नहीं मिल रहा। शिक्षा अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं, जिससे बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे अभिभावकों ने मुख्य द्वार पर बैठकर सरकार व शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। डीईओ कार्यालय के मुख्य द्वार पर अभिभावकों के धरने के कारण डीईओ गाड़ी लेकर नहीं जा सके। मौके पर पहुंची पुलिस ने धरने पर बैठे अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहे।
प्रवेश कुमारी के नेतृत्व मेें बुधवार सुबह करीब 10 बजे अभिभावक एकत्रित होकर सेक्टर-14 स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस बीच जिला शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र नरवाल कार्यालय पहुंचे और अभिभावकों का समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार जिन बच्चों का दाखिला हो चुका है, वे पढ़ते रहेंगे। अगर उन बच्चों को कोई स्कूल पढ़ाने से इनकार करता है तो शिकायत दें, कार्रवाई की जाएगी। इस नियम के तहत नए दाखिले नहीं होंगे। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि जो बच्चे दाखिले से वंचित हैं, उनका राजकीय स्कूलों में दाखिला करवाएं ताकि पढ़ाई बाधित न हो, लेकिन अभिभावक अलॉट किए गए स्कूलों में दाखिले की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान डीईओ गाड़ी में बैठकर जाने लगे तो अभिभावक मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। जिससे डीईओ को गाड़ी से उतरकर वापस कार्यालय में जाना पड़ा। मौके पर पहुंची पुलिस ने भी धरना दे रहे अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे निजी स्कूल संचालकों की बैठक बुलाकर इस मसले का समाधान करने की मांग पर अड़े रहे। बाद में डीईओ ने निजी स्कूल संचालकों की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ही अभिभावक लौटे।
सरकार के आदेश पर निकलवाए थे एसएलसी
गुस्साए अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा नियम 134ए के तहत ली गई मूल्यांकन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट कर दिए गए थे। सरकार व शिक्षा विभाग के आश्वासन के बाद ही उन्होंने पुराने स्कूलों से अपने बच्चों के एसएलसी निकलवाए, लेकिन निजी स्कूलों ने पात्र विद्यार्थियों को दाखिला देने से इनकार कर दिया। अभिभावक अपने बच्चों को दाखिला दिलवाने के लिए उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी से भी मिले, धरने प्रदर्शन किए। सीएम विंडो पर भी शिकायत दी, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने हर हाल में दाखिले करवाने का आश्वासन दिया था। ऐसे में अभिभावकों का दोष कहां है? अब सरकार ने निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नियम 134ए ही खत्म कर दिया। जिससे अभिभावकों में सरकार व शिक्षा विभाग के खिलाफ रोष है।
उच्च न्यायालय ने दिए दाखिला दिलवाने के आदेश
प्रवेश कुमारी ने बताया कि नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को अलॉट किए गए निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने की मांग को लेकर अभिभावकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने इस मामले में अभिभावकों के पक्ष में फैसला दिया है। वे न्यायालय के आदेश की प्रति लेकर डीईओ कार्यालय के कई दिनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आज तक अधिकारियों ने सकारात्मक जवाब नहीं दिया। जिससे अभिभावकों में रोष है। 8 मार्च को डीईओ कार्यालय मेें निजी स्कूल संचालकों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें अभिभावक भी शामिल होंगे। बैठक के बाद ही दाखिलों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
नियम 134ए के संबंध में अभिभावक व बच्चे दाखिले की मांग को लेकर कार्यालय पर पहुंचे थे। इस मामले में पहले से ही केस उच्च न्यायालय में चला हुआ है। उसमें जो भी आदेश आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस नियम के तहत जिन बच्चों के दाखिले हो चुके हैं, अगर कोई स्कूल उन्हें पढ़ाने से इनकार करता है तो शिकायत दें, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बिजेंद्र नरवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, सोनीपत।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के द्वार पर धरने पर बैठे अभिभावक मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए। - फोटो : Sonipat