नियम 134ए के तहत अलॉट स्कूलों में दाखिला न मिलने से गुस्साए अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की है। इसके लिए पात्र विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। जिन विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है, उनके अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की जा रही है। छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर का कहना है कि शिक्षा विभाग पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने के बजाय, दोबारा प्रमाणपत्रों की जांच करवाकर समय पूरा कर रहा है, जिससे अभिभावकों में रोष है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य किसी भी सूरत में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
नियम 134ए के तहत मूल्यांकन परीक्षा का परिणाम 16 दिसंबर को घोषित किया गया था। इसमें 2542 विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए गए थे। इनको 24 दिसंबर तक अलॉट स्कूल मेें उपस्थिति दर्ज करवाने के निर्देश दिए गए थे। विद्यार्थी जब निजी स्कूलों में दाखिला लेने पहुंचे तो निजी स्कूल संचालकों ने दाखिला देने से मना कर दिया। शिक्षा विभाग ने दाखिले की अंतिम तिथि तीन बार बढ़ाई और नियमों की अवमानना करने वाले निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। इसके बाद भी निजी स्कूल दाखिला देने के लिए राजी नहीं हुए। अभिभावकों ने बच्चों को साथ लेकर निजी स्कूलों के बाहर धरने प्रदर्शन किए, अधिकारियों को शिकायत दी, लघु सचिवालय व डीईओ कार्यालय में बच्चों की पाठशाला भी लगाई। एक माह से चल रहे प्रदर्शन के बाद भी जब न्याय नहीं मिला तो अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है।
52 अभिभावकों ने जताई सहमति
बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने की मांग के लिए अब तक 52 अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की सहमति जताई है। छात्र अभिभावक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बच्चों का भविष्य किसी भी सूरत मेें खराब नहीं होने दिया जाएगा। जिला प्रशासन व शिक्षा अधिकारियों से न्याय न मिलने के बाद ही उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बनाया है। इसके लिए पात्र विद्यार्थियों के अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है।
936 विद्यार्थियों का अभी तक नहीं हुआ दाखिला
मूल्यांकन परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद पहले ड्रॉ में 2542 विद्यार्थियों को स्कूल अलॉट किए गए थे। अंतिम तिथि तक इनमें से महज 1099 विद्यार्थियों को ही दाखिला मिल पाया है, जबकि 507 विद्यार्थियों का दाखिला निरस्त कर दिया गया है। 936 विद्यार्थी आज भी दाखिले के लिए शिक्षा विभाग के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। एक महीने से धरने-प्रदर्शन के बाद भी दाखिला न मिलने से अधिकतर विद्यार्थियों के अभिभावकों का तो हौसला भी जवाब देने लगा है। कुछ शीत लहर की चपेट में आकर बीमार हो चुके हैं। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि जब तक बच्चों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक चुप नहीं बैठेंगे।
जारी रहेगा संघर्ष : विमल किशोर
छात्र-अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने कहा है कि दाखिला न देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय अब विद्यार्थियों के आय प्रमाणपत्रों की जांच शुरू की जा रही है। यह केवल समय खराब करने वाली बात है। शिक्षा विभाग भले सभी प्रमाणपत्रों की जांच करवा ले, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दे कि पात्र विद्यार्थियों को दाखिला मिलेगा या नहीं। साथ ही नियमों की अवमानना करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए अब अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। जब तक विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
वर्जन
शिक्षा विभाग ने नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों के आय प्रमाणपत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिसकी तैयार शुरू कर दी है। जिले में अब तक 1099 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। 936 विद्यार्थियों का दाखिला अभी शेष है। अधिकारियों के जैसे आदेश मिलेंगे, उसके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। किसी भी बच्चे का साल खराब नहीं होने दिया जाएगा।
- मनोज वर्मा, प्रभारी, नियम 134ए, सोनीपत