सोनीपत। जिलाभर में जैन समुदाय की ओर से दश लक्षण पर्व मनाया जा रहा है। इसके तहत सेक्टर-15 स्थित जैन मंदिर में प्रार्थना, व्रत अनुष्ठान कर ध्यान सत्र लगाकर प्रवचन किया गया।
राष्ट्र संत महायोगी उपाध्याय 108 डाॅ. गुप्ति सागर महाराज ने शांति, एकता व नैतिक जीवन के मूल्यों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया, ताकि न केवल जैन समुदाय, बल्कि समग्र समाज को प्रेरणा मिल सके।
उपाध्याय 108 डाॅ. गुप्ति सागर महाराज ने अहिंसा परमो धर्म का संदेश देते हुए बताया कि दक्ष लक्षण पर्व आत्म-शुद्धि, चिंतन व सर्वोच्च सद्गुणों के अभ्यास को समर्पित 10 दिवसीय आध्यात्मिक उत्सव है। इन अनुष्ठानों का केंद्र बिंदु अहिंसा परमो धर्म का शाश्वत सिद्धांत है। अहिंसा धर्म का सर्वोच्च रूप है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को आज के अशांत समय में अहिंसा की गहन प्रासंगिकता का स्मरण भी कराया। डॉ. गुप्ति सागर महाराज ने बताया कि संघर्ष, तनाव व बढ़ती असहिष्णुता से भरे इस युग में सच्ची शक्ति प्रतिशोध में नहीं, बल्कि संयम, करुणा व समझदारी में निहित है। डॉ. गुप्ति सागर महाराज ने कहा कि दश लक्षण पर्व दस प्रमुख गुणों पर प्रकाश डालता है।
इन दश लक्षण में क्षमा, विनम्रता, सरलता, संतोष, सत्य, संयम, तप, त्याग, अनासक्ति व ब्रह्मचर्य शामिल हैं। यह गुण व्यक्तिगत उत्थान व सामाजिक समरसता के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का काम करते हैं। इनमें से कुछ मूल्यों का ईमानदारी से पालन करने से मनुष्य समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकता है।
दश लक्षण पर्व का पालन एक शाश्वत अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है, जो सच्चे सुख, मुक्ति का मार्ग, करुणा, अहिंसा व आत्म-अनुशासन से शुरू होता है।