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जांच में खरे नहीं उतरे प्रदूषण जांच केंद्र, तीन सप्ताह में अपडेट कराने के निर्देश

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प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों के लिए लगाई कार्यशाला में उपस्थित परिवहन विभाग के अधिकारी व अन्य। ? - फोटो : Sonipat
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परिवहन विभाग की जांच मेें जिले के प्रदूषण जांच केंद्र खरे नहीं उतरे। जिसके बाद अधिकारियों ने सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को तीन सप्ताह के अंदर अपडेट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद छापा मार अभियान चलाया जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नियमों की अवहेलना कर प्रदूषण जांच केंद्रों को अपडेट न कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण जांच केंद्रों के मानकों पर खरा नहीं उतरने पर अधिकारियों ने केंद्र संचालकों की कार्यशाला आयोजित कर वाहनों का प्रदूषण परीक्षण करने की जानकारी दी। यही नहीं केंद्र संचालकों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।
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दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर साल दर साल बढ़ता जा रहा है। वायु व ध्वनि प्रदूषण में बड़ी भागीदारी वाहनों की है। प्रदूषण जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। केंद्रों पर न तो मानकों के अनुसार जांच की जा रही है और न ही इन प्रशिक्षित कर्मचारी नियुक्त हैं। इस खुलासा गत सप्ताह परिवहन विभाग की टीम द्वारा जिले के प्रदूषण जांच केंद्रों के निरीक्षण के दौरान हुआ। जांच में सामने आया कि किसी भी केंद्र पर मानक पूरे नहीं हैं। किसी भी केंद्र पर प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं मिला। आधे से ज्यादा केंद्रों पर प्रदूषण जांच का सॉफ्टवेयर भी अपडेट नहीं था। प्रदूषण जांच के नाम पर अधिकारियों को गुमराह कर वाहन चालकों को खानापूर्ति का प्रमाणपत्र देकर मनमानी वसूली की जा रही है।
197 जांच केंद्रों को जारी किए नोटिस
परिवहन विभाग ने जिले के 197 प्रदूषण जांच केंद्रों को नोटिस जारी किया है, जिसमें तीन सप्ताह में अपने कंप्यूटर सिस्टम को अपडेट करवाने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में कहा है कि केंद्र संचालकों को सिस्टम अपडेट कर इसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग को भेजनी होगी। प्रदूषण जांच के लिए विभाग वाहनों का डाटा बेस तैयार कर रहा है। इससे पता चल सकेगा कि कितने जांच केंद्रों पर वाहन मैकेनिकल या ऑटो मोबाइल का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले विशेषज्ञ हैं। जांच में सामने आया है कि जिले में तीन महीने में एक भी वाहन को प्रदूषण मानकों पर अयोग्य नहीं पाया गया है। सभी वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। इसके लिए 60-100 रुपये के शुल्क के स्थान पर दो-तीन गुना तक वसूली की जा रही है।
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केंद्र संचालकों के लिए आयोजित की कार्यशाला
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय के हॉल में प्रदूषण जांच केंद्र के संचालकों की कार्यशाला आयोजित की, जिसमें आरटीओ मानव मलिक, सड़क सुरक्षा अधिकारी राजेश मलिक व परिवहन निरीक्षक प्रेमवीर सिंह ने प्रदूषण जांच करने का प्रशिक्षण दिया। सबसे पहले बूथ संचालकों व विशेषज्ञों से प्रदूषण जांच करने संबंधी जानकारी मांगी गई। कार्यशाला में एक भी संचालक इसका उत्तर नहीं दे सका।
वर्जन
प्रदूषण जांच केंद्र के संचालकों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदूषण जांच की मूलभूत जानकारी दी गई। केंद्रों को अपडेट करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। उसके बाद जांच अभियान चलाया जाएगा। जिन केंद्रों पर मानक पूरे नहीं होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- मानव मलिक, जिला परिवहन अधिकारी, सोनीपत
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