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एमएसपी समेत लंबित मांगों का भी पीएम करें समाधान : एसकेएम

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कुंडली बॉर्डर पर कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद नाचकर जश्न मनाते किसान। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की तीन कृषि कानूनों को वापस करने की घोषणा सही दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। किसानों की लड़ाई ने देश में एक ऐसा माहौल बना दिया है जिससे पूरे देश के लोगों को भी एक रास्ता मिल गया है कि वह आने वाले दिनों में अपने मुद्दों को लेकर संघर्ष करें। लंबे समय तक अनुशासन व संयम के साथ आंदोलन चलाने के लिए किसान बधाई के पात्र हैं। साथ ही कहा कि जल्द ही संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक बुलाकर एमएसपी पर गारंटी कानून समेत कई लंबित मांगों पर आगामी रणनीति तय की जाएगी।
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एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने शुक्रवार को कुंडली बॉर्डर पर कहा कि तीन किसान-विरोधी कानूनों को निरस्त करने के भारत सरकार के निर्णय के संबंध में प्रधानमंत्री की शुक्रवार सुबह की घोषणा स्वागत योग्य है। यह देश के किसानों की एकजुटता की पहली बड़ी जीत है। कानूनों को निरस्त करने के लिए मजबूर कर किसानों के संघर्ष ने देश में लोकतंत्र और भारत में संघीय राज्य व्यवस्था को बहाल किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अभी भी कई मांगें लंबित हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन लंबित मामलों के बारे में जानकारी है। एसकेएम को उम्मीद है कि भारत सरकार तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के अलावा किसानों की लाभकारी एमएसपी की गारंटी के लिए वैधानिक कानून सहित सभी जायज मांगों को पूरा करने की पूरी कोशिश करेगी।
डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि एसकेएम सभी घटनाक्रमों का आकलन करेगा और अपनी अगली बैठक में आगे के लिए आवश्यक निर्णय लेगा। इस अवसर पर एसकेएम ने अब तक इस आंदोलन में शहीद हुए किसानों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
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धरनास्थल पर मनाई गुरु नानक देव की जयंती
संयुक्त किसान मोर्चा ने कुंडली बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर गुरु नानक देव की जयंती धूमधाम व श्रद्धा के साथ मनाई। एसकेएम की ओर से कहा गया कि बेहतर दुनिया बनाने के लिए गुरु नानक देव द्वारा बताए गए मूल्यों से प्रेरणा आगे बढ़ने का संकल्प लेता है। साथ ही एसकेएम ने कहा कि सामाजिक कुरीतियों और अत्याचार के खिलाफ गुरु नानक की सीख आंदोलन का मार्गदर्शन करती रहेंगी। वहीं, प्रधानमंत्री द्वारा तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारियों में नया जोश और उत्साह देखने को मिला।
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