सोनीपत में लकड़ी की मदद से अंतिम संस्कार करते वारियर्स।
प्रबंधन के अनुसार सीएनजी से एक शव का अंतिम संस्कार होने में दो घंटे का समय लगता है। मशीन को ठंडा होने और अस्थियां संग्रहित करने के लिए 30 मिनट का समय चाहिए। सबसे पहले कोविड रोगी की सूचना उनके परिजन मुक्तिधाम पर देते हैं। उसके बाद सीएमओ से ऑनलाइन उसकी रिपोर्ट मुक्तिधाम को प्राप्त होती है। उसको नगर आयुक्त को भेजा जाता है। नगर आयुक्त की स्वीकृति के बाद स्पेशल टीम अंतिम संस्कार कराती है।
रविवार को पहुंचे पांच कोविड से मरने वालों के शव
रविवार को मुक्तिधाम पर कोविड से मरने वालों के पांच शव पहुंचे थे। मुक्तिधाम के रिकॉर्ड के अनुसार सेक्टर 14 के राजेंद्र ठक्कर, सुदामापुरी के बीसेखा, बहालगढ़ के शिवचरन, लाखू बुआना की सावित्री देवी और लाल दरवाजा के कौशल चंद्र की मौत कोरोना संक्रमण से हुई थी। इनके अंतिम संस्कार रविवार को किए गए। इसमें स्पेशल स्टाफ रात में दो बजे तक लगा रहा। वहीं मुक्तिधाम में सोमवार को खानपुर मेडिकल कॉलेज से चार, भगवानदास अस्पताल से चार और आस्कर अस्पताल से वाया सामान्य अस्पताल तीन शव पहुंचे।
कोरोना संक्रमित व संदिग्ध शवों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ऐसे में प्रशासनिक गाइडलाइन के अनुसार सीएनजी सिस्टम से इनका अंतिम संस्कार कराना संभव नहीं है। इसके चलते उनको शमशान घाट में लकड़ी से अंतिम संस्कार की स्वीकृति मिल गई है। पीपीई किट में सुरक्षा के साथ शवों के अंतिम संस्कार कराए जा रहे हैं। - डॉ. डीएन मल्होत्रा, सचिव शिव मुक्तिधाम, सेक्टर-15।