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सरकार से चाहिए स्पष्ट व ठोस आश्वासन : एसकेएम

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि 4 दिसंबर की पूर्व घोषित बैठक में आंदोलन को लेकर अगली रणनीति बनाई जाएगी। इसी बैठक में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाए गए बिंदुओं और ताजा हालात पर गहन मंथन होगा। बैठक में सभी घटक संगठन शामिल होंगे। एसकेएम ने कहा कि किसानों की लंबित मांगों पर केंद्र सरकार के अस्पष्ट बयान या आश्वासन स्वीकार नहीं है। वह लंबित मांगों पर ठोस आश्वासन और समाधान चाहते हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने मंगलवार को कुंडली बॉर्डर पर कहा कि मोर्चा स्पष्ट करता है कि पूर्व घोषणा अनुसार स्थिति का जायजा लेने और किसान आंदोलन के आगे के कदमों के बारे में निर्णय लेने के लिए एसकेएम के सभी घटक संगठनों की बैठक 4 दिसंबर को होगी। एसकेएम बैठक कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर ही होगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं और भविष्य में लिए जाने वाले फैसलों पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर स्पष्ट करता है कि किसानों की लंबित मांगों की प्रतिक्रिया के रूप में भाजपा सरकारों द्वारा यहां-वहां अस्पष्ट बयान या आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन वह ठोस आश्वासन और समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के सीएम मनोहर लाल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि जब उनके राज्य में 48 हजार किसानों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की बात आती है, तो वह केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करेंगे। ऐसे में मोदी सरकार किसानों के शेष मांगों को पूरा करने की अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
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एसकेएम नेता डॉ. दर्शन पाल ने कहा दिसंबर 2020 में सरकार ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में प्रतिबद्धता जताई थी, मगर मौजूदा संसद सत्र में विद्युत संशोधन विधेयक 2021 को सूचीबद्ध किया जाना सरासर वादाखिलाफी है। ऐसा ही मामला दिल्ली के वायु प्रदूषण के संबंध में बायोमास जलाने के लिए किसानों को दंडित करने का है। उन्होंने कहा कि अविश्वसनीय व्यवहार के चलते यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि किसान संगठन किसी भी मौखिक बयान पर केंद्र सरकार पर भरोसा किस तरह तरह करेंगे।
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