भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोगों के पास अपनों के लिए समय नहीं है, ऐसे में पुलिस का एक जवान जीवों का जीवन बचाने में जुटा है। हरियाणा के सोनीपत की शास्त्री कॉलोनी गली नंबर-1 निवासी मुकेश मलिक पत्नी पूजा मलिक के साथ भीषण गर्मी में पक्षियों व कुत्तों का जीवन बचाने की मुहिम चलाए हुए हैं। मुकेश मलिक अपने वेतन से हर माह 10 से 15 हजार रुपये जीव रक्षा पर खर्च कर रहे हैं।
यही नहीं भीषण गर्मी से कुत्तों व पक्षियों को बचाने के लिए लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। इस कड़ी में वे लोगों को कसोरे वितरित कर रहे हैं। अब पक्षियों को गर्मी से बचाने के लिए केरल से घोंसले मंगवाए हुए हैं। कसोरों व घोंसलों को नि:शुल्क वितरित किया जाएगा।
शास्त्री कॉलोनी निवासी मुकेश मलिक का कहना है कि मनुष्य को किसी प्रकार की तकलीफ होती है तो वह बोलकर बता देता है, लेकिन बेजुबान अपनी तकलीफ किसी को नहीं कह सकते। ऐसे में मनुष्य का फर्ज बनता है कि अपने साथ इन बेजुबानों का भी ध्यान रखें। मुकेश मलिक बताते हैं कि मेरा पक्षियों व कुत्तों से बचपन से ही लगाव रहा है। समय के साथ यह लगाव और गहरा होता चला गया। वर्ष 1998 में आर्मी में ज्वाइन किया।
उस दौरान भी पक्षियों व कुत्तों से लगाव कम नहीं हुआ। मुकेश बताते हैं कि उनका तबादला कुपवाड़ा एरिया में हो गया। वहां पर भी मैं कुत्तों को रोटियां खिलाना नहीं भूलता था। यही कारण था कि कुत्ते भी मेरे पास ही रहते थे। ड्यूटी के दौरान कई बार आंख लग जाती थी। कुत्तों को जरा भी आहट सुनाई देती थी तो तुरंत भौंकना शुरू कर देते थे, कई बार कुत्तों की वजह से ही जान भी बची है। यही कारण है कि कुत्तों से इतना अधिक लगाव है।
मौसम के साथ बदलते हैं सेवा कार्य
मुकेश का कहना है कि वह आर्मी से वर्ष 2014 में हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वर्ष 2016 में हरियाणा पुलिस में नियुक्ति पाई। ड्यूटी के साथ ही कुत्तों के लिए समय निकालना नहीं भूले। वे कहते हैं कि गर्मियों में पक्षियों के लिए घरों की छत पर पानी से भरे कसोरे रखते हैं और कुत्तों के खाने का प्रबंध करते हैं। वहीं सर्दियों में कुत्तों के लिए गलियों में ही रैन बसेरे बनाते हैं।
जहां कहीं भी जरूरतमंद लोग मिलते हैं, उन्हें कंबल व कपड़े वितरित करते हैं। बारिश में पौधरोपण करते हैं, ताकि पक्षियों को रहने के लिए आवास का प्रबंध हो सके और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल सके। मुकेश बताते हैं कि उन्होंने अपनी कार को ही एंबुलेंस बनाया हुआ है। कुत्ता बीमार हो जाता है तो उसे अपनी कार से ही डॉक्टर के पास ले जाते हैं। इससे कार की सीट भी फट चुकी है। घरेलू कार्यों में भी इसे ही प्रयोग करते हैं।
कुत्तों की भरमार होने से नाराज थे लोग
मुकेश बताते हैं कि शास्त्री कॉलोनी में वे कुत्तों को रोटी खिलाते थे, जिससे कुत्ते उनके पास रहने लगे। इससे कॉलोनीवासी नाराज थे। कई बार विरोध किया। मेरे इस कार्य से मेरी पत्नी भी प्रेरित हुईं और एमए, बीएड होने के बावजूद कुत्तों की सेवा करती हैं। कुत्तों को अब घर में बैठाती हैं। यही नहीं घर के बाहर उनके नहाने व खाने के लिए भी प्रबंध करती हैं। हम दोनों कुत्तों को खुजली से बचाने के लिए जगह-जगह लोगों को अपने खर्च पर गोलियां भी वितरित करते हैं।
लोग भी होने लगे हैं जागरूक
मुकेश मलिक बताते हैं कि वर्तमान में पक्षियों की प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं। ऐसे मेें हमें इन्हें बचाना है। वे वर्षों से जीवों का जीवन बचाने व लोगों को इसके प्रति जागरूक करने में लगे हुए हैं। खुशी इस बात की है कि लोग अब जागरूक होने लगे हैं। लोग अपने घरों की छत पर न सिर्फ पानी से भरे कसोरे रख रह रहे हैं, बल्कि पौधरोपण की तरफ भी ध्यान देने लगे हैं।