विलाप करती सिपाही की बेटी व परिजन।
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पंडित लख्मीचंद के पैतृक गांव जांटी कलां के सिपाही का शव शनिवार दोपहर दिल्ली पुलिस शव लेकर पैतृक गांव पहुंची और सम्मान के साथ सिपाही का अंतिम संस्कार किया। खुद दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी निघिन विल्सन गांव में आए और परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया।
बच्चों को नौकरी और न्याय की मांग
आनंद सिंह की पत्नी नरेशवती ने कहा कि उसके पति अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए हैं। परिवार में आनंद ही एक कमाने वाले शख्स थे। नरेशवती ने अपने बच्चों को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। वहीं, नर्सिंग का कोर्स कर चुकी बेटी प्रियंका ने कहा कि उसके पिता बहादुरी के साथ बदमाशों से लड़कर शहीद हुए हैं। उसने सवाल किया कि लोगों को कब तक ऐसे हालात से गुजरना पड़ेगा। वह चाहती है कि ऐसा किसी के साथ न हो।
उसने पिता के लिए न्याय और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की। वहीं, स्नातक कर दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर की भर्ती की तैयारी कर रहे आनंद सिंह के बेटे अमित ने कहा कि पिता उसे गाइड करते थे। उनका किसी से कोई झगड़ा नहीं था। वह काफी खुश रहते थे। लेकिन अब परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से साहसी जवान आनंद के बेटे को पुलिस में नौकरी के लिए गुहार लगाई।
श्रद्धांजलि देने वालों का तांता
जवान के पार्थिव शरीर को आसपास के गांव से आए और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें कांग्रेस नेता रणजीत कौशिक, प्रदेश सचिव सुखबीर जांटी, इनेलो के अशोक शर्मा, एसडीएम मंगेेज सिंह, एसीपी सौरभ चंद्र, शाहबाद डेरी एसएचओ अशोक शर्मा भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए।