फोटो - पंडित अमित शोनको
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। साल का दूसरा व अंतिम चंद्रग्रहण आश्विनी शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को लगेगा। चंद्रग्रहण के अद्भुत नजारे को 28 व 29 की मध्यरात्रि को देखा जा सकेगा। खास बात यह है कि यह चंद्रग्रहण भारत में नजर आएगा। इस कारण इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि आश्विनी मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्षों बाद शरद पूर्णिमा व गज केसरी योग में चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। इसका सभी जातकों पर प्रभाव रहेगा। ग्रहण व सूतक काल में सिलाई-बुनाई का काम नहीं करना चाहिए।
पंडित शोनक ने बताया कि शरद पूर्णिमा यानी 28 व 29 अक्तूबर की मध्य रात्रि को होने वाला चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, संपूर्ण एशिया, यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण- पूर्वी व उत्तर-पूर्वी अमेरिका में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होगा। उन्होंने बताया कि चंद्रग्रहण भारतीय समय के अनुसार 28 व 29 अक्तूबर की रात्रि 01 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा, जो 02 बजकर 24 मिनट पर संपूर्ण होगा। भारत के सभी नगरों में चंद्रग्रहण का प्रारंभ, मध्य व मोक्ष देखा जा सकेगा। चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले लगने वाला सूतक 28 अक्तूबर को शाम 4 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा। ग्रहण सूतक एवं ग्रहण काल में स्नान, दान, जप-पाठ, मंत्र जाप, मंत्र सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान आदि शुभकार्य का करना कल्याणकारी माना जाता हैं।
यह कार्य रहेंगे वर्जित
पंडित शोनक ने बताया कि सूतक व चंद्रग्रहण के समय में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना-पीना, नाखून काटना वर्जित होता है। सूतक के समय में बाल, वृद्ध, रोगी व गर्भवती महिलाओं को यथा अनुकूल भोजन व दवाइयां लेने में कोई भी दोष नहीं होता है। अगर हम सूतक काल में अपने खाने-पीने की वस्तुओं में कुशा, तिल, तुलसी दल डाल दें तो सारे दोष दूर हो जाते हैं।