केंद्र सरकार के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट कुंडली-गाजियाबाद-पलवल पेरिफेरल-वे के निर्माण की राह में लगातार बाधा आ रही हैं। केजीपी निर्माण को लेकर रविवार को फिर से इस इलाके के किसान बिफर गए और कामकाज बंद करा दिया। हालांकि, ये किसान कुछ दिन पहले प्रशासन की टीम के साथ मौका-मुआयना करने पहुंचे थे और सब कुछ तय शर्तों के हिसाब से होने का दावा कर रहे थे। लेकिन अब फिर किसानों ने प्रशासन पर शर्तों की अनदेखी करने तथा अपने वायदे से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए काम रोक दिया और जमकर हंगामा किया।
रविवार को मनौली, खुर्मपुर, जाखौली सहित पांच गांवों के किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मनौली के पास पहुंच कर निर्माण कार्य को रोक दिया। निर्माण स्थल पर तंबू गाड़ कर किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक वह निर्माण कार्य को पूरा नहीं होने देंगे। वहीं, घटना की सूचना मिलने के बाद बीडीपीओ, तहसीलदार, कुंडली एसएचओ सहित कई अधिकारियों ने किसानों को समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे।
बता दें कि लंबे समय से केजीपी के करीब तीन किलोमीटर लंबे क्षेत्र पर विवाद चल रहा है। जाखौली, मनौली, हंसापुर अटेरना, खुर्मपुर आदि गांवों के किसान सरकार से पलवल की तर्ज पर मुआवजे की मांग कर रहे थे। अप्रैल, 2016 में सरकार ने किसानों की मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया था। वहीं, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने भी किसानों की अन्य समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया था। इसके बाद केजीपी का निर्माण शुरू हो गया था।
पांच गांव के किसान हुए एकजुट
रविवार को पांच गांवों के किसानों ने काम बंद करा दिया। रात के समय किसानों ने 20 से 25 लोगों की निर्माण स्थल पर ड्यूटी भी लगाई है। इस मुद्दे पर रविवार को मनौली गांव में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में पांच गांवों की पंचायत का आयोजन किया गया। इसके बाद किसानों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए काम रुकवा दिया।
प्रशासन के खिलाफ भी जताया रोष
किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी हर किसान को रास्ता देने की बात कही। किसानों ने मांग की कि किसानों के खेतों के लिए दिए जाने वाले रास्ते को केजीपी के डिजाइन में शामिल किया जाए। किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को कहा कि वे शांतिपूर्वक तरीके से अपनी मांगें मनवाना चाहते हैं। इसलिए प्रशासनिक अधिकारी जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं करते, तब तक वे किसी भी हालत में काम शुरू नहीं होने देंगे।
बढ़ा मुआवजा और किसानों को मिले रास्ता : ताहर सिंह
किसानों की दो मांगे हैं कि उन्हें बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाए और खेतों में जाने के लिए रास्ता दिया जाए। दोनों ही मांगों पर आश्वासन देने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। किसानों को मजबूरी में निर्माण कार्य रुकवाना पड़ रहा है।
-ताहर सिंह, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ