गोहाना (सोनीपत)। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में जब से भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार बनी है, तब से नौकरियां किराने की दुकान पर सामान की तरह बेची गईं हैं। इस मामले में पहले एक चेयरमैन को सस्पेंड किया गया, फिर एक साथ करोड़ों रुपये मिले और पेपरों की ओमएआर सीटें भी खाली मिली। इससे जाहिर होता है कि यह काम एक आदमी का नहीं हो सकता। इसकी जांच हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश से कराई जाए।
वह शुक्रवार को शहर के विष्णु नगर में शादी-समारोह में शिरकत करने के बाद पत्रकारों को बातचीत कर रहे थे। भूपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार नौकरी के मामले में सफाई दे रही है कि वह साफ है। इसके बावजूद हाईकोर्ट के न्यायाधीश से जांच कराने में संकोच कर रही है। इस मामले को विपक्ष की ओर से विधानसभा में जोरशोर से उठाया जाएगा। भूपेंद्र हुड्डा ने किसान आंदोलन को लेकर कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना लंबा संघर्ष नहीं देखा। पहले भी कई आंदोलन हुए हैं। चूंकि अबकी बार किसानों के भविष्य का सवाल था। इस आंदोलन में किसानों के अन्य भी मुद्दे हैं। इनमें काफी किसानों पर मुकदमे दर्ज करने का भी मुद्दा शामिल है। जब कानून वापस हो गए हैं तो किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे भी वापस होने चाहिए। हुड्डा के अनुसार उन्होंने खुद वर्किंग ग्रुप का चेयरमैन रहते हुए एमएसपी को लागू करने की सिफारिश की थी। अब तो कृषि में लागत और बढ़ गई है। कृषि व्यवसाय घाटे का सौदा हो गया है, इसलिए एमएसपी को लागू करना बहुत जरूरी है। उनकी मांग है कि एमएसपी को स्वामीनाथन के सी-2 फार्मूले के अनुसार लागू किया जाए, ताकि कृषि व्यवसाय लाभदायक बन सके। इस दौरान गोहाना हलके के विधायक जगबीर सिंह मलिक, बरोदा से इंदुराज नरवाल, खरखौदा से जयवीर वाल्मीकि, वरिष्ठ नेता डॉ. कपूर सिंह नरवाल, प्रेमवती भनवाला, अनूप मलिक, प्रमेंद्र जौली आदि मौजूद रहे।