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प्रतिभा: प्रीतम ने पहले खुद देश को चैंपियन बनाया, अब महिला हॉकी की कर दी फौज तैयार, इतने अवॉर्ड है इनके नाम

Tue, 08 Mar 2022 02:31 AM IST
भूपेंद्र सिंह रवींद्र कौशिक, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

प्रीतम सिवाच राष्ट्रमंडल खेलों में देश को गोल्ड मेडल दिला चुकीं है। उनसे प्रशिक्षित लाडलियां एशिया कप जीत चुकी हैं। वह सेमीफाइनल में पहुंची ओलंपिक टीम की सदस्य रही हैं। इन्हें हॉकी में द्रोणाचार्य अवॉर्ड प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला कोच होने का गौरव मिला है।
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प्रीतम सिवाच - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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प्रीतम सिवाच महिला हॉकी का वह नाम है, जिसने पहले खुद देश को चैंपियन बनाया और अब इस खेल की पूरी फौज ही तैयार कर डाली। देश में महिला हॉकी को क्षितिज पर ले जाने के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं। वह देश को ओलंपिक का पदक नहीं दिला सकी थीं, लेकिन अपने उसी सपने को साकार करने के लिए भारतीय महिला हाकी टीम की पूर्व कप्तान व प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच जिले में हॉकी की बेहतरीन पौध तैयार करने में लगी हैं।

 

उनसे प्रशिक्षित तीन लड़कियों ने टोक्यो ओलंपिक में देश को पहली बार सेमीफाइनल तक ले जाने में सफलता पाई है। उनके प्रयास से लड़कियां घरों की चहारदीवारी से बाहर निकलकर हॉकी के मैदान में उतर रही हैं। उनकी तराशी खिलाड़ी हॉकी में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रही हैं। 

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प्रीतम सिवाच 18 साल से प्रशिक्षण दे रही हैं। वह देश को महिला हॉकी में ओलंपिक पदक दिलाने से चूक गई थी। अपने उसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र में लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था।

 

वह 2004 से लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। उनकी ख्वाहिश है कि उनकी देखरेख में प्रशिक्षण लेकर खिलाड़ी देश को ओलंपिक का पदक दिलाए। इस समय उनकी देखरेख में करीब 165 लड़कियां नियमित रूप से हॉकी का अभ्यास कर रही हैं। वह ज्यादातर जरूरतमंद खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। वह उन्हें स्वयं हर स्तर की सुविधा उपलब्ध कराती है।   

वर्ष 1987 में थामी थी हॉकी स्टिक 
हरियाणा के गुरुग्राम के गांव झाड़सा में जन्मी प्रीतम सिवाच ने वर्ष 1987 में स्टिक थामी थी। उस समय वह सातवीं कक्षा की छात्रा थीं। उन्होंने 1990 में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब मिला। उन्होंने 1992 में जूनियर एशिया कप में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया था। 

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मिल चुका द्रोणाचार्य, अर्जुन व भीम अवॉर्ड 
प्रीतम सिवाच को द्रोणाचार्य, अर्जुन व भीम अवॉर्ड मिल चुका है। उनसे प्रशिक्षित खिलाड़ी नेहा गोयल, निशा वारसी, किरण दहिया, ज्योति रूमावत व महिमा अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रही हैं। वहीं रेलवे की ज्यादातर महिला खिलाड़ियों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया है। वह खेल से ज्यादा प्रशिक्षण के कार्य को अधिक चुनौती भरा मानती है।

 

प्रीतम कहती हैं कि खिलाड़ी को स्वयं के अंदर जज्बा पैदा करना होता है, लेकिन एक प्रशिक्षक को तो दूसरे के अंदर खेल भावना को जगाना पड़ता है। प्रीतम सिवाच का कहना है कि अर्जुन व द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलना गौरव की बात है। इससे ओर बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है। मैंने हमेशा अपने काम को ईमानदारी से किया और देश के लिए बेहतर खिलाड़ी तैयार किए। खेल के प्रति ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने ही यह मुकाम दिलाया है। प्रीतम सिवाच बताती हैं कि उन्हें वर्ष 1998 में अर्जुन अवॉर्ड मिला था। 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद किसी महिला खिलाड़ी को अर्जुन पुरस्कार मिला था।

ये उपलब्धियां हैं उनके नाम

  • 1992 में पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जूनियर एशिया कप में बेस्ट प्लेयर का खिताब।
  • 1998 में एशियाड में देश की कप्तानी करते हुए बैंकाक में 15 वर्ष बाद प्रतियोगिता का रजत पदक।
  • 2002 में मैनचेस्टर इंग्लैंड में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक।
  • 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम की प्रशिक्षक बनीं।
  • चाइना में एशियन गेम व अर्जेंटीना में हुए विश्व कप में टीम को प्रशिक्षण दिया।
  • 2017 एशिया कप स्वर्ण पदक विजेता टीम को प्रशिक्षण दिया।  
  • वर्ष 2021 में हॉकी में द्रोणाचार्य अवॉर्ड प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला कोच बनीं।
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