प्रीतम सिवाच महिला हॉकी का वह नाम है, जिसने पहले खुद देश को चैंपियन बनाया और अब इस खेल की पूरी फौज ही तैयार कर डाली। देश में महिला हॉकी को क्षितिज पर ले जाने के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं। वह देश को ओलंपिक का पदक नहीं दिला सकी थीं, लेकिन अपने उसी सपने को साकार करने के लिए भारतीय महिला हाकी टीम की पूर्व कप्तान व प्रशिक्षक प्रीतम सिवाच जिले में हॉकी की बेहतरीन पौध तैयार करने में लगी हैं।
उनसे प्रशिक्षित तीन लड़कियों ने टोक्यो ओलंपिक में देश को पहली बार सेमीफाइनल तक ले जाने में सफलता पाई है। उनके प्रयास से लड़कियां घरों की चहारदीवारी से बाहर निकलकर हॉकी के मैदान में उतर रही हैं। उनकी तराशी खिलाड़ी हॉकी में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रही हैं।
प्रीतम सिवाच 18 साल से प्रशिक्षण दे रही हैं। वह देश को महिला हॉकी में ओलंपिक पदक दिलाने से चूक गई थी। अपने उसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र में लड़कियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था।
वह 2004 से लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। उनकी ख्वाहिश है कि उनकी देखरेख में प्रशिक्षण लेकर खिलाड़ी देश को ओलंपिक का पदक दिलाए। इस समय उनकी देखरेख में करीब 165 लड़कियां नियमित रूप से हॉकी का अभ्यास कर रही हैं। वह ज्यादातर जरूरतमंद खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही हैं। वह उन्हें स्वयं हर स्तर की सुविधा उपलब्ध कराती है।
वर्ष 1987 में थामी थी हॉकी स्टिक
हरियाणा के गुरुग्राम के गांव झाड़सा में जन्मी प्रीतम सिवाच ने वर्ष 1987 में स्टिक थामी थी। उस समय वह सातवीं कक्षा की छात्रा थीं। उन्होंने 1990 में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया, जिसमें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब मिला। उन्होंने 1992 में जूनियर एशिया कप में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया था।
प्रीतम कहती हैं कि खिलाड़ी को स्वयं के अंदर जज्बा पैदा करना होता है, लेकिन एक प्रशिक्षक को तो दूसरे के अंदर खेल भावना को जगाना पड़ता है। प्रीतम सिवाच का कहना है कि अर्जुन व द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलना गौरव की बात है। इससे ओर बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है। मैंने हमेशा अपने काम को ईमानदारी से किया और देश के लिए बेहतर खिलाड़ी तैयार किए। खेल के प्रति ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने ही यह मुकाम दिलाया है। प्रीतम सिवाच बताती हैं कि उन्हें वर्ष 1998 में अर्जुन अवॉर्ड मिला था। 15 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद किसी महिला खिलाड़ी को अर्जुन पुरस्कार मिला था।
ये उपलब्धियां हैं उनके नाम