भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने प्रदर्शन से देश में महिला हॉकी को नया मुकाम पर पहुंचाया है। सभी खिलाड़ियों ने इसके लिए कड़ा संघर्ष किया। खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं की बात करें तो कोच प्रीतम सिवाच ने अपने स्तर पर ही सभी सुविधाएं मुहैया करवाई हैं। जिला प्रशासन की तरफ से भी खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग मिले और जिले में सभी खेलों के लिए पर्याप्त साधन मुहैया करवाए जाएं तो देश की झोली में और भी पदक आ सकते हैं। - श्याम सुंदर गोयल, हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल के ताऊ
डाइट मिलती है न कोई सुविधा, मैदान भी खुद करते हैं साफ
ओलंपिक में हमारी टीम ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए शानदार वापसी की लेकिन देश के लिए पदक जीतने से चूक गए। अब पूरा ध्यान एशियन व कॉमनवेल्थ खेलों पर रहेगा। ओलंपिक में जो कमियां रही हैं, उन्हें दूर कर स्वर्ण पदक लाने का प्रयास करेंगे। जिले में हॉकी खिलाड़ियों को न डाइट मिलती है और न ही किसी प्रकार की सुविधा। ग्राउंडमैन भी नहीं है, जिससे सभी खिलाड़ी पहले मैदान साफ करती हैं, फिर अभ्यास किया जाता है। जो सुविधाएं मिलीं, वे सभी कोच प्रीतम सिवाच ने ही मुहैया करवाई हैं। अगर जिला प्रशासन की तरफ से सुविधाएं मिलें और एस्ट्रोटर्फ की बेहतर सुविधा दी जाए तो कई खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। - नेहा गोयल, खिलाड़ी, भारतीय महिला हॉकी टीम
बिना सुविधा कैसे तैयार होंगे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
भारतीय महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। अगर यहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कैसे तैयार हो सकेंगे। हॉकी में लड़कियों को पारंगत करने के लिए शहर के अंदर एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। इसकी फाइल तैयार कर डीसी को दी गई लेकिन यह मांग आज तक जिले से आगे ही नहीं बढ़ पाई। हालत यह है कि एस्ट्रोटर्फ मैदान की फाइल तक गुम कर दी गई है। खेल मंत्री व सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना होगा, तभी खिलाड़ी देश के लिए पदक ला सकेंगे।- प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम