शराब कारोबारी संदीप बड़वासनी व उसके दो साथियों की हत्या गोहाना में हेड कांस्टेबल संजीत उर्फ बोडा के घर की गई थी। संदीप को संजीत ने ही फोन कर अपने घर बुलाया था और वहां पर रामकरण बैंयापुर से रंजिश के चलते संदीप व उसके दो साथियों को गोलियों से भूून दिया गया था। हत्या करने के बाद उनके शवों को ठिकाने लगाने के लिए अन्य साथियों के हवाले किया गया था। यह खुलासा तिहरे हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए गांव खांडा निवासी अनिल उर्फ लीला व अशोक उर्फ गोलू ने किया है। रामकरण गैंग के दोनों सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है, जिससे वारदात में प्रयुक्त हथियार बरामद करने के साथ अन्य सबूत जुटाए जा सकें। पुलिस रामकरण के साथ ही हेड कांस्टेबल संजीत उर्फ बोडा की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
11 फरवरी को गोहाना जाने के लिए निकला था संदीप
बता दें कि शराब कारोबारी व कई मामलों में नामजद रहा गांव बड़वासनी का संदीप 11 फरवरी की दोपहर को गोहाना जाने के लिए अपने घर से निकला था। उसके साथ उसका साथी पानीपत के गांव मतलौड़ा का रहने वाला सुरेंद्र राठी भी था। दोनों गोहाना में शराब कारोबारी गांव रूखी निवासी बलबीर के पास गए थे। उसके बाद वह तीनों लापता हो गए। मामले में 13 फरवरी को बलबीर के बहनोई तथा 14 फरवरी को संदीप की पत्नी विनिता ने बलबीर व संदीप के अपहरण का मामला दर्ज कराया था। सुरेंद्र के परिजनों ने पानीपत में उसके अपहरण का मामला दर्ज किया था। विनिता ने मामले में नौ नामजद व 10 अन्य के खिलाफ शिकायत दी थी। आरोपियों में हेड कांस्टेबल संजीत उर्फ बोड़ा भी शामिल था।
27 फरवरी को चार की गिरफ्तारी
मामले में 27 फरवरी को वेस्ट दिल्ली स्थित पैसीफिक माल के पास से दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद चार बदमाशों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपी गांव पांची जाटान निवासी सुशील उर्फ शीला व सुनील उर्फ उल्लू, गांव नयाबांस का अमेश उर्फ मेशा और गांव महलाना का अमित उर्फ लांबा थे। आरोपियों ने संदीप, बलबीर और सुरेंद्र राठी की हत्या करने की बात कबूल की थी। एसआईटी गोहाना ने आरोपियों को 12 दिन तक रिमांड पर रखा, लेकिन उसके बावजूद कुछ खास नहीं उगलवा सकी थी। मामले में परिजनों के आरोप के बाद एसआईटी प्रभारी योगेंद्र को निलंबित कर दिया गया था। उनके स्थान पर एसआई राजीव सिंह को एसआईटी गोहाना की कमान दी गई थी। राजीव सिंह व जलजीत की टीम ने कार्रवाई करते हुए मामले में दो आरोपियों खांडा निवासी अनिल उर्फ लीला व अशोक उर्फ गोलू खरखौदा बाईपास से काबू किया है। पुलिस ने उन्हें अदालत में पेश कर सात दिन के रिमांड पर लिया है।
नहीं मिल सका सुरेंद्र का शव
एसआईटी प्रभारी राजीव सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों ने हत्या मामले में कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि रामकरण के कहने पर हरियाणा पुलिस में हवलदार संजीत उर्फ बोड़ा ने संदीप को अपने घर बुलाया था। वहां पर पहले से ही रामकरण के साथ वह तथा अन्य साथी मौजूद थे। पुलिस कर्मी के घर पर ही हत्या करने के बाद तीनों के शवों को खुर्द-बुर्द करने के लिए सुशील उर्फ शीला व अन्य को सौंपा गया था। बाद में यूपी के मसूरी थाना की पुलिस ने गंगनहर से बलबीर और मुरादनगर पुलिस ने संदीप का शव बरामद किया था। सुरेंद्र के शव का कोई सुराग नहीं लग सका था। राजीव सिंह ने बताया कि आरोपी पुलिस कर्मी संजीत व रामकरण सहित उनके साथियों के संभावित ठिकानों पर दबिश जारी है। वह भी जल्द पुलिस पकड़ में होंगे।
संदीप बड़वासनी सहित तिहरे हत्याकांड में पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। दो आरोपियों को काबू किया गया है, जिन्होंने पुलिस कर्मी के घर हत्या करने की बात कबूल की है। अन्य आरोपी भी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।
-राहुल देव, डीएसपी, विशेष जांच अधिकारी।