गोहाना । जिले में कोरोना से मौत का आंकड़ा अचानक बढ़ते देखकर इसको रोकने का तरीका प्रशासन व मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने तलाश लिया है। कोरोना के गंभीर मरीजों को बचाने के लिए बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में पहली बार रेमेडिसिवर के 200 इंजेक्शन मंगवाए गए हैं। इससे उन मरीजों को बचाने में मदद मिलेगी, जिनको गंभीर हालत होने पर वेंटीलेटर पर रखा जाता है। क्योंकि वेंटीलेटर पर रखे गए मरीजों को कोई भी गोली व अन्य दवा नहीं दी जा सकती है और उनको केवल इंजेक्शन लगाया जा सकता है। इसको देखते हुए ही रेमेडिसिवर का इंजेक्शन पहली बार उपलब्ध कराए गए हैं जो प्रदेश के कुछ ही अस्पतालों में मौजूद हैं। इसकी पांच डोज वेंटीलेटर पर रहने वाले मरीज को दी जाएंगी, जिससे उसके ठीक होने की ज्यादा उम्मीद रहेगी और इससे मौत का आंकड़ा रुकने की उम्मीद लगाई जा रही है।
जिले में कोरोना के सामान्य मरीजों को होम आइसोलेट किया जा रहा था तो कोविड केयर सेंटर में रखा जा रहा है। वहीं गंभीर हालत वाले मरीजों को बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में भर्ती कराया जाता है। जहां उनको ज्यादा हालत खराब हमोने पर वेंटीलेटर पर रखा जा सके। इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों में लगभग छह कोरोना मरीजों की उपचार के दौरान मौत हुई तो प्रशासन व मेडिकल कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ गई। इसका कारण देखा गया तो वेंटीलेटर पर मरीज को रखने के दौरान हालत में सुधार के लिए कोई भी गोली व अन्य दवाई नहीं दी जा सकती है। जिससे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती जाती है और उसकी मौत हो जाती है। जिसका उपाय तलाश किया गया तो पता चला कि वेंटीलेटर पर रहने वाले मरीजों को रेमेडिसिवर के इंजेक्शन दिए जा सकते हैं, जिससे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के साथ ही हालत में सुधार होने की ज्यादा उम्मीद है। जिसके बाद रेमेडिसिवर के इंजेक्शन का पता कराया गया तो बाजार में वह ब्लैक में दस गुणा तक महंगा मिल रहा था। लेकिन डीसी श्यामलाल पूनिया व मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. एपीएस बत्रा ने एचएमसीएल कंपनी से संपर्क किया और वह 200 इंजेक्शन सरकारी दाम पर देने के लिए तैयार हो गई। जिसके बाद कंपनी से इंजेक्शन लिए गए, जिससे कोरोना के गंभीर हालत वाले मरीजों को मरने से बचाया जा सके।
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बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां में पहली बार रेमेडिसिवर के 200 इंजेक्शन मंगवाए गए हैं। जिसको वेंटीलेटर पर रहने वाले कोरोना के गंभीर मरीजों को दिया जा सकता है। एक मरीज को पांच डोज तक दी जाएंगी, जिससे उसके ठीक होने की ज्यादा उम्मीद रहेगी। यह इंजेक्शन की मांग अधिक होने के कारण बाजार में कई गुना महंगा बिक रहा है, लेकिन एचएमसीएल कंपनी से करार करके इसको सरकारी दाम में लिया गया है। इससे कोरोना की मृत्युदर को काफी कम किया जा सकता है।
-डॉ. एपीएस बत्रा, डायरेक्टर बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां