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पहले कोरोना ने राेका, अब बसें न चलने से छूट रही शिक्षा की डोर

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सोनीपत बस अड्डा। - फोटो : Sonipat
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कोरोना काल के बाद से जिले के पांच ग्रामीण रूटों पर बसों की कमी बनी हुई है। इन रूटों पर आने वाले दर्जनों गांवों के यात्री बस सेवा शुरू न होने से परेशान हैं। गांवों में बस सुविधा न होने से जहां विद्यार्थी समय पर स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिस कारण उनकी शिक्षा की डोर छूट रही है। वहीं ग्रामीणों के भी जरूरी काम अटक रहे हैं। गांवों में बस सेवा शुरू करने की मांग के लिए ग्रामीण कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी मांग को अनसुना कर दिया जाता है, जिससे ग्रामीणों में रोष है।
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ग्रामीणों का कहना है कि बस सेवा शुरू न होने से उन्हें सोनीपत आने-जाने में भारी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। ऑटो या किसी निजी वाहन का घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो बेहद जरूरी काम भी छूट जाते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि इन सभी रूटों पर बस सेवा जल्द शुरू की जाए।
इन मार्गों पर नहीं चल रही रोडवेज बसें
सोनीपत से गोरड़ रूट पर बस सेवा न चलने से गांव ककराई, खेड़ी, निरथान, नकलोई, बिधलान, सिलाना, गोरड़ के ग्रामीण परेशान हैं। नांदनौर रूट पर मुरथल, बख्तावरपुर, पबनेरा, जैनपुर, टिकौला, असदपुर, नांदनौर के ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। घसौली रूट पर मुरथल, भिगान, पीपली खेड़ा, गन्नौर, घसौली व दो अन्य गांवों के ग्रामीण लंबे समय से बस सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा खुर्रमपुर व बड़ौली रूट पर आने वाले गांवों के ग्रामीण कई बार बस सेवा बहाल करने की मांग कर चुके हैं।
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सात गांवों के लोग सालों से बस सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे
सोनीपत से गोरड़ रूट पर सात गांव आते हैं। इन गांवों में सालों से बस सेवा बंद है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सहकारी समिति की बस चलती थी, लेकिन कई साल से वह भी नहीं चल रही। गांव से सुबह कुछ ऑटो सोनीपत जाते हैं और शाम को ही लौटते हैं। पूरा दिन सोनीपत जाने के लिए कोई साधन नहीं है। बेहद जरूरी काम होने पर ग्रामीणों को साइकिल पर ही मजबूरन 20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। इन गांवों के ग्रामीण सालों से बस सेवा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यह इंतजार कब पूरा होगा, नहीं कहा जा सकता।
बोले ग्रामीण
शिक्षा में आ रही बाधा
गांवों में बस सेवा शुरू न होने के कारण स्कूल-कॉलेज में जाने में परेशानी झेलनी पड़ती है। रोजाना किसी न किसी से लिफ्ट मांगकर आना-जाना पड़ता है। कई बार तो साधन न मिलने के कारण समय पर स्कूल-कॉलेज नहीं पहुंच पाते। पहले कोरोना, अब बसें न चलने से शिक्षा बाधित हो रही है।
- नकुल शर्मा
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छूट जाते हैं जरूरी काम
गांव में बस सुविधा न होने के कारण ऑटो या अन्य निजी वाहनों के भरोसे रहना पड़ता है। इनके आने-जाने का कोई समय निर्धारित नहीं होता। जिस कारण कई बार बेहद जरूरी काम भी छूट जाते हैं।
- प्रदीप दहिया
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बाइक है तो जाओ, नहीं तो घर बैठो
कोरोना काल के बाद से गांव में बस सेवा शुरू नहीं हो पाई है। हालत यह है कि अगर आपके पास बाइक या अन्य कोई साधन है तो चले जाओ, नहीं तो अपने घर पर ही बैठो। प्रशासन को चाहिए कि जल्द बस सेवा शुरू करवाए।
- राजेंद्र दहिया
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कई बार कर चुके हैं मांग
ग्रामीण रूट पर बस सेवा शुरू करवाने की मांग के लिए कई बार अधिकारियों से मांग कर चुके हैं। आश्वासन तो बहुत मिले, लेकिन आज तक बस सेवा शुरू नहीं हो पाई है, जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
जयदीप
ग्रामीणों की भी समझें परेशानी
गांवों में बस सेवा बहाल न होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। बसों के अभाव में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहने के साथ ही अन्य जरूरी काम भी अटक जाते हैं। अधिकारियों को चाहिए कि ग्रामीणों की भी परेशानियों को समझें और बस सेवा शुरू करवाई जाए।
- महेश
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वर्जन
बस अड्डे से विभिन्न मार्गों पर रोजाना करीब 90 बसें रवाना होती हैं। रोडवेज का प्रयास है कि सभी यात्रियों को बेहतर सुविधा दी जा सके। कोरोना काल के बाद स्थिति सामान्य होने पर धीरे-धीरे सभी रूटों पर बस सेवाएं बहाल की जा रही हैं। जिन रूटों पर बसें नहीं जा रहीं, उन पर भी बस सेवा शुरू की जाएगी।
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- श्रीभगवान, डीआई, रोडवेज बस डिपो, सोनीपत
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